हनुमान जन्मोत्सव पर कैसे करें आराधना,क्या होंगे लाभ

जानिए हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मन्त्र और आवश्यक बातें :-

पञ्चाङ्ग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को संकटमोचन राम भक्त श्री हनुमान का जन्म हुआ था। इस बार हनुमान जन्मोत्सव १६ अप्रैल को मनाया जाएगा। राम भक्त हनुमान की इस दिन विशेष पूजा अर्चना करने का विधान है। जानें हनुमान जन्मोत्सव पर किस विधि से करें पूजा, पूजा के विशेष नियम, शुभ मुहूर्त क्या हैं? मंत्र के साथ यह भी जान लें कि हनुमान जी की पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है।

हनुमान जन्मोत्सव पर करें नारियल के उपाय:-

हनुमान जन्मोत्सव के दिन नारियल लेकर हनुमान मंदिर जाएं और उसे अपने ऊपर से सात बार वारते हुए हनुमान जी के सामने फोड़ दें।ज्योतिष के अनुसार इस उपाय को करने से सारी बाधाएं दूर होती हैं।

पीपल के पत्ते की माला चढ़ाएं :-

हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी को गुलाब की माला चढ़ाएं। इस दिन 11 पीपल के पत्तों पर श्री राम का नाम लिखकर इनकी माला बनाएं और हनुमान जी को अर्पित करें। ऐसा करने से बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है और शनि दोष दूर होता है।

राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें :-

हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान मंदिर में श्री राम, माता सीता और हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन करते हुए राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है। इससे शनि देव भी खुश होते हैं और शनि दोष से राहत मिलती है।

हनुमान जी को चढ़ाएं सिंदूर का चोला :-

हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। इसलिए संकटों से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जन्मोत्सव के दिन बजरंगबली को सिंदूर का चोला चढ़ाना अत्यंत शुभ होता है। इससे बजरंगबली प्रसन्न होकर आरोग्य, सुख- समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इससे शनि की नजर भी दूर होती है।

हनुमान जन्मोत्सव पर शनि दोष दूर करने के लिए ये करे :-

हनुमान जन्मोत्सव के दिन शाम के समय हनुमान मंदिर जाकर बजरंगबली को केवड़े का इत्र और गुलाब की माला चढ़ाना शुभ होता है। साथ ही इस दिन सरसों के तेल का दीपक जलाकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि दोष से छुटकारा मिलता है।इतना ही नहीं भगवान हनुमान अत्यंत प्रसन्न होते हैं और सारे संकट दूर करते हैं।

हनुमान जन्मोत्सव २०२२ पर बन रहा रवि योग :-

पंचांग की गणना के अनुसार इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव पर रवि योग बन रहा है। शास्त्रों में इस योग को किसी भी कार्य को सम्‍पन्न करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। रवि-योग को सूर्य का विशेष प्रभाव प्राप्त होने के कारण प्रभावशाली योग माना गया है। यही कारण है कि सूर्य की पवित्र ऊर्जा से भरपूर होने से इस योग में किया गया कार्य में असफलता मिलने की संभावना बहुत कम हो जाती है। पंचांग के अनुसार इस दिन यानि १६ अप्रैल को हस्त नक्षत्र सुबह ०८ बजकर ४० मिनट तक है। इसके बाद चित्रा नक्षत्र आरंभ होगा। इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेगा।

हनुमान जी की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान :-

हनुमान जी की पूजा में चरणामृत का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
हनुमान जी की पूजा करने वाले भक्त को उस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।हनुमान जी की पूजा करते समय काले और सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचें।हनुमान जी की पूजा करते समय ब्रह्राचर्य व्रत का पालन करना चाहिए।हनुमान जन्मोत्सव पर खंडित और टूटी हुई मूर्ति की पूजा न करें।पवन पुत्र हनुमान जी को हलुवा, गुड़ से बने लड्डू, बूंदी या बूंदी के लड्डू, पंच मेवा, डंठल वाला पान, केसर-भात और इमरती अत्यंत प्रिय हैं. इन मिष्ठानों का भोग लगाने से हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

हनुमान जी के मंत्र :-

ॐ तेजसे नम:
ॐ प्रसन्नात्मने नम:
ॐ शूराय नम:
ॐ शान्ताय नम:
ॐ मारुतात्मजाय नमः

हनुमान जन्मोत्सव पूजा विधि

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए चौमुखी दीपक जलाएं। इसके अलावा हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।हनुमान जी की पूजा में गेंदे, हजारा, कनेर, गुलाब के फूल चढ़ाएं जबकि जूही, चमेली, चम्पा, बेला इत्यादि फूलों को चढ़ाने से परहेज करें।मालपुआ, लड्डू, चूरमा, केला, अमरूद आदि का भोग लगाएं।हनुमान जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।दोपहर तक इस दिन कोई भी नमकीन चीज खाने से बचें।इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने से शीघ्र मनोकामना की पूर्ति होती है।

हनुमान जन्मोत्सव का शुभ मुहूर्त :-

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि १६ अप्रैल दिन शनिवार को प्रात: ०२ बजकर २५ मिनट पर शुरु हो रही है।पूर्णिमा तिथि का समापन इसी दिन रात १२ बजकर २४ मिनट पर हो रहा है।सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि १६ अप्रैल को प्राप्त हो रही है, इसलिए हनुमान जन्मोंत्सव १६ अप्रैल को मनाया जाएगा।

 

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