उत्तर प्रदेशराज्य

प्रयागराज में गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी: संगम में स्नान के बाद बंधवा स्थित लेटे हनुमान के किए दर्शन, बजरंग बली की गुरु स्वरूप में पूजा 

गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व गुरुओं के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह दिन व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में गुरु को ईश्वर के समकक्ष माना गया है, और यही कारण है कि यह पर्व विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।

 

प्रयागराज में इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम तट पर स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगाने से न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और आत्मिक शुद्धि का भी अनुभव होता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि गुरु पूर्णिमा के दिन संगम में स्नान करने से जीवन की नकारात्मकता दूर होती है और मन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

संगम स्नान के बाद बड़ी संख्या में भक्त बंधवा स्थित “बड़े हनुमान जी” के मंदिर पहुंचे। यह मंदिर हनुमान जी की लेटी हुई मुद्रा के लिए प्रसिद्ध है और देश का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां हनुमान जी इस रूप में विराजमान हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन यहां दर्शन का विशेष महत्व है, क्योंकि हनुमान जी को कई भक्त गुरु के रूप में पूजते हैं। तुलसीदास जी ने भी उन्हें अपना गुरु माना था।

बंधवा पर लेटे हनुमान जी के दर्शन से श्रद्धालुओं को मनोकामनाओं की पूर्ति, आत्मबल और भय से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। भक्तों ने यहां पुष्प, नारियल और सिंदूर चढ़ाकर हनुमान जी से कृपा की कामना की।

गुरु पूर्णिमा का यह पर्व प्रयागराज में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का एक सजीव चित्र प्रस्तुत करता है, जहां संगम स्नान और लेटे हनुमान जी के दर्शन से भक्तों को दिव्यता और शांति की अनुभूति होती है। यह दिन गुरु तत्व की स्मृति और उसके मार्गदर्शन को आत्मसात करने का उत्तम अवसर होता है

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