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“क्या हम अपनी अर्थव्यवस्था बंद कर दें?” — ट्रंप और NATO की टैरिफ धमकी पर भारतीय उच्चायुक्त का तीखा जवाब

ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि कोई भी देश अपनी अर्थव्यवस्था को एक झटके में बंद नहीं कर सकता. ब्रिटेन के टाइम्स रेडियो को दिए इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा कि कई यूरोपीय देश उन्हीं स्रोतों से ऊर्जा और दुर्लभ खनिज खरीद रहे हैं, जिनसे वे भारत को खरीदने से मना कर रहे हैं.

दोराईस्वामी ने पश्चिमी देशों की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, “कई यूरोपीय देश आज भी उन्हीं स्रोतों से रेयर अर्थ और ऊर्जा उत्पाद खरीद रहे हैं, जिनसे वे हमें खरीदने से मना कर रहे हैं. क्या यह विरोधाभासी नहीं है?”

भारत क्यों खरीद रहा है रूसी तेल?

भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, पहले ज्यादातर तेल मीडिल ईस्ट से खरीदता था, लेकिन 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद, रूस ने वैकल्पिक खरीदारों को आकर्षित करने के लिए भारी छूट पर तेल बेचना शुरू किया. भारत ने इस अवसर का लाभ उठाया.

दोराईस्वामी ने कहा, “हमारे पारंपरिक ऊर्जा स्रोत अब दूसरों ने हथिया लिए हैं और कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं. हम अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करते हैं. ऐसे में हमारे पास क्या विकल्प है? क्या हम अपनी अर्थव्यवस्था बंद कर दें?”

रूस के साथ भारत के संबंधों पर सफाई

रूस के साथ भारत की नजदीकी पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, “हमारा रिश्ता सिर्फ एक नेता या सरकार पर आधारित नहीं है. यह लंबे समय से चला आ रहा सुरक्षा सहयोग है. जब कुछ पश्चिमी देश हमें हथियार बेचने से मना करते थे और हमारे पड़ोसियों को वही हथियार बेचते थे, तो रूस ने हमारी मदद की.”

उन्होंने यह भी कहा कि जैसे दूसरे देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर रिश्ते बनाते हैं, वैसे ही भारत भी अपने ऊर्जा और सामरिक हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है.

यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख

दोराईस्वामी ने यह भी दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार कहा है कि यह युद्ध का समय नहीं है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी यह बात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की दोनों से कह चुके हैं. उन्होंने आगे कहा, “भारत इस युद्ध को जल्द समाप्त होता देखना चाहता है, जैसे हम दुनिया भर में चल रहे सभी संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं.”

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