राष्ट्रीय
पूर्व CJI चंद्रचूड़ का वकीलों के लिए संदेश – “अपमान को नज़रअंदाज़ कर न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता दें”

पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने वकील बनने की इच्छा रखने वालों को सलाह दी कि वे विरोधियों के अपमान को नज़रअंदाज़ करें, क्योंकि इससे मुकदमा जीतने में कोई मदद नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि वे सेवानिवृत्ति के बाद भी इसी सिद्धांत का पालन कर रहे हैं।
विधि छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि वकालत एक तनावपूर्ण पेशा है और वकीलों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को व्यवस्थित रूप से दूर किया जाना आवश्यक है। उनका कहना था कि वकीलों को अपनी पहचान सबसे पहले न्याय के सुविधादाता के रूप में स्थापित करनी चाहिए और नैतिकता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और कानून के छात्रों को आजीवन सीखने वाला तथा स्वतंत्र विचारक होना चाहिए। उन्होंने यह भी सलाह दी कि अपनी राय के प्रति हमेशा ईमानदार और जिम्मेदार रहें।
कानून और तथ्यों के बारे में उन्होंने कहा कि इन्हें गहराई से जानें और इस बात का ध्यान रखें कि मामले को पुराने फैसलों के ज़रिए सही ठहराने की कोशिश में भटकें नहीं।




