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“वह दिन याद है जब चिड़ावा में न्याय ने भ्रष्टाचार को मात दी”

वह सोमवार सुबह थी। एसीबी टीम के भीतर एक सन्नाटा और गंभीरता थी। सबकी निगाहें एक ही लक्ष्य पर थीं – न्याय।
मैं उस कार्रवाई का प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, लेकिन जब सुना कि राजविका मिशन की ब्लॉक प्रभारी रेणुका और उनके साथी धर्मेंद्र को रिश्वत लेते पकड़ा गया, तो मन में राहत की लहर दौड़ गई।
वह दिन लोगों के दिल में हमेशा रहेगा — जब चिड़ावा ने दिखाया कि सच्चाई हारती नहीं।
जिस आशा सहयोगिनी ने शिकायत की, उसने न सिर्फ अपना हक पाया, बल्कि समाज में उम्मीद जगाई।
वह पल, जब एसीबी टीम ने आरोपी के हाथों से नोट बरामद किए, न्याय की एक नई सुबह थी।
आज भी जब यह घटना याद आती है, तो लगता है —
“सच्चाई देर से जीतती है, लेकिन जीतती जरूर है।”




