प्रवर्तन सिपाही भर्ती में ओबीसी कोटे की खुलेआम लूट : लौटनराम निषाद

लखनऊ।
भाजपा सरकार पर आरक्षण नियमावली की अनदेखी कर ओबीसी वर्ग के अधिकारों की खुलेआम लूट करने का गंभीर आरोप लगाते हुए भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी लौटनराम निषाद ने कहा कि मौजूदा सरकार में सामाजिक न्याय का गला घोंटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा का सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास का नारा केवल दिखावा है, जबकि वास्तविकता में पिछड़े वर्गों के अधिकार छीने जा रहे हैं।
लौटनराम निषाद ने आरोप लगाया कि आरक्षण की हकमारी पर भाजपा का कोई सवर्ण मंत्री, सांसद या विधायक सामने आकर जवाब नहीं देता, लेकिन निजी स्वार्थ में भाजपा व एनडीए के कुछ पिछड़े वर्ग के नेता बेशर्मी से सरकार का बचाव करते नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नेता संविधान और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर चुप रहते हुए केवल सत्ता के पिछलग्गू बनकर रह गए हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय आरक्षण नियमावली के अनुसार अनारक्षित वर्ग को 40 प्रतिशत, ओबीसी को 27 प्रतिशत, एससी को 15 प्रतिशत, एसटी को 7.5 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। वहीं उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली में अनारक्षित 40 प्रतिशत, ओबीसी 27 प्रतिशत, एससी 21 प्रतिशत, एसटी 2 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस 10 प्रतिशत निर्धारित है। इसके बावजूद भाजपा सरकार में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के आरक्षण पर डकैती की जा रही है।
निषाद ने कहा कि संसद में ओबीसी के 137 और एससी/एसटी के 132 सांसद होने के बावजूद संविधान, लोकतंत्र और प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर 90 प्रतिशत जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे रहते हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 90 ओबीसी और 67 एससी/एसटी विधायक हैं, लेकिन आरक्षण नियमावली के उल्लंघन पर किसी की आवाज नहीं उठती।
उन्होंने यूपीएसएसएससी द्वारा जारी परिवहन निगम में प्रवर्तन सिपाही भर्ती का हवाला देते हुए कहा कि कुल 477 पदों में ओबीसी को केवल 99 पद आरक्षित किए गए हैं, जबकि नियमों के अनुसार 27 प्रतिशत के हिसाब से ओबीसी को 129 पद मिलने चाहिए थे। इस प्रकार ओबीसी वर्ग के 30 पदों की खुलेआम हकमारी की गई है।
इसके अलावा उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग द्वारा मेडिकल ऑफिसर भर्ती में भी आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय आरक्षण नियमावली के विपरीत अनारक्षित वर्ग की सीटें बढ़ाई गईं, जबकि ओबीसी और एसटी वर्ग की सीटों में कटौती कर उनके अधिकारों की लूट की गई।
लौटनराम निषाद ने मांग की कि आरक्षण नियमावली का सख्ती से पालन किया जाए और जिन भर्तियों में ओबीसी, एससी व एसटी वर्ग के साथ अन्याय हुआ है, उन्हें तत्काल संशोधित किया जाए, अन्यथा भारतीय ओबीसी महासभा आंदोलन के लिए बाध्य होगी।




