G RAM G: 350 विशेषज्ञों ने की मनरेगा को खत्म न करने की अपील, केंद्र सरकार को लिखा खुला पत्र

350 विशेषज्ञों ने केंद्र सरकार से मनरेगा योजना को समाप्त न करने की अपील की है। उन्होंने इस संबंध में एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें ग्रामीण रोजगार और आजीविका सुरक्षा में मनरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों ने सरकार से योजना को मजबूत करने और इसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का आग्रह किया है ताकि लाखों ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलता रहे।
HighLights
- 350 विशेषज्ञों ने मनरेगा को खत्म न करने की अपील की।
- केंद्र सरकार को ग्रामीण रोजगार योजना पर खुला पत्र लिखा।
- मनरेगा ग्रामीण आजीविका के लिए महत्वपूर्ण, मजबूत करने का आग्रह।
केंद्र सरकार को कई शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं ने मंगलवार को खुला पत्र लिखकर मनरेगा को खत्म नहीं करने की मांग की। कहा कि इस योजना को खत्म करने के बजाय इसके कार्यान्वयन से जुड़ी समस्याओं को दूर किया जाना चाहिए। इस पत्र पर लगभग 350 शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने हस्ताक्षर किए हैं।
इसमें कहा गया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म करने और उसकी जगह ‘विकसित भारत-रोजगार गारंटी आजीविका मिशन-ग्रामीण’ (वीबी-जी राम जी) अधिनियम लाने के लिए दिए गए तर्कों में कई खामियां हैं।
पत्र में कहा गया है कि मनरेगा की मांग-आधारित व्यवस्था क्रांतिकारी अवधारणा थी, जो अधिकार-आधारित रोजगार गारंटी के सिद्धांत से जुड़ी थी। गरीब अपने अधिकारों की मांग कर सकते थे, हाशिए पर खड़े लोगों को अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का अवसर मिलता था और अल्पसंख्यकों की आवाज सुनी जा सकती थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि नई योजना इस पूरी प्रक्रिया को कमजोर कर देगी। इस तर्क को भी गलत बताया गया कि मनरेगा के कारण खेती के सीजन में मजदूरों की कमी होती है। पत्र में कहा गया है कि मनरेगा की मजदूरी दर कृषि मजदूरी से 40 से 50 प्रतिशत तक कम है। मनरेगा कोई स्थायी रोजगार नहीं है, बल्कि इसका उपयोग तब किया जाता है जब खेत का काम उपलब्ध नहीं होता।
बजट को केंद्र और राज्य के बीच साझा करने को लेकर पत्र में कहा गया है कि खर्च का बोझ राज्यों पर डालने से राजनीतिक भेदभाव बढ़ सकता है। राज्य सरकारें खर्च से बचने के लिए काम की मांग दबा सकती हैं, जिससे बेरोजगारी और पलायन बढ़ेगा। कहा गया है कि 125 दिन रोजगार देने का वादा भ्रामक है।




