वेनेजुएला तो बस शुरुआत है.. 2026 में वो 9 जगह जहां कभी भी छिड़ सकता है महायुद्ध; देखें पूरी लिस्ट

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप और काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस ने 2026 के लिए 10 संभावित वैश्विक संघर्षों की सूची जारी की है, जिसमें वेनेजुएला में एक संघर्ष पहले ही शुरू हो चुका है। रिपोर्ट मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, रूस-यूक्रेन और एशिया में बढ़ते तनाव पर प्रकाश डालती है। इसमें ड्रोन और साइबर हमलों जैसे युद्ध के नए तरीकों का भी उल्लेख है। यह चेतावनी दी गई है कि क्षेत्रीय विवाद बड़े वैश्विक संघर्षों में बदल सकते हैं, जिससे 2026 एक खतरनाक साल बन सकता है।
HighLights
- वेनेजुएला में अमेरिका के साथ सीधा सैन्य टकराव शुरू।
- मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, एशिया में 9 अन्य संघर्षों का खतरा।
- ड्रोन, साइबर हमले जैसे नए युद्ध तरीके वैश्विक जंग की शुरूआत कर सकते हैं।
साल 2026 शुरू हुए अभी चार दिन ही हुए हैं, लेकिन दुनिया पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक जगह बन चुकी है। वेनेजुएला में अमेरिका के साथ सीधा सैन्य टकराव शुरू हो चुका है और विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है।
ब्रुसेल्स स्थित इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप और न्यूयॉर्क की काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस ने 2026 के लिए 10 सबसे खतरनाक संभावित संघर्षों की सूची जारी की है। इनमें से एक तो पहले ही भड़क चुका है। बाकी नौ जगहों पर छोटी-सी चिंगारी भी वैश्विक आग लगा सकती है। ये सिर्फ क्षेत्रीय झगड़े नहीं, बल्कि बड़े देशों को खींचकर तीसरे विश्व युद्ध जैसा माहौल बनाने की क्षमता रखते हैं।

2025 की जंगों ने साफ कर दिया कि अब युद्ध पुराने तरीके से नहीं लड़े जाएंगे। यानी अब नए तौर तरीकों से जंग लड़ी जा रही हैं। मसलन ड्रोन्स का झुंड, साइबर हमले और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ने इसे पूरी तरह बदल दिया है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हम एक और खूनी साल की ओर बढ़ रहे हैं?
मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में उबाल
मिडिल ईस्ट अभी भी बारूद के ढेर पर बैठा है। इजराइल-ईरान-लेबनान का त्रिकोण सबसे खतरनाक माना जा रहा है। हिजबुल्लाह के साथ कोई भी गलत कदम सीधी जंग छेड़ सकता है।
दूसरी ओर इजराइल-फिलिस्तीन विवाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा, जबकि सीरिया में फिर से सिविल वॉर भड़कने के पूरे आसार हैं। जानकारों का कहना है कि इजराइल और तुर्किए की दखलअंदाजी इस इलाके की स्थिति को और विस्फोटक बना सकती है।

वहीं अफ्रीका में सूडान की सिविल वॉर सबसे ज्यादा फैलने की संभावना वाली है। मिडिल ईस्ट के कई देश और तुर्किए इसमें शामिल हो चुके हैं। इससे यह क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकती है। इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच पुराना बॉर्डर विवाद फिर सिर उठा सकता है, जबकि माली और बुर्किना फासो में चल रहा संघर्ष भी स्थानीय गुटों को और मजबूत कर रहा है।
रूस-यूक्रेन से लेकर एशिया तक जंग के आसार
रूस-यूक्रेन युद्ध 2026 में भी जारी रहने की पूरी आशंका है। दोनों तरफ दबाव बढ़ रहा है, लेकिन सीजफायर की कोई आस दूर तलक नजर नहीं आती है। वहीं उत्तर कोरिया का न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम भी चिंता बढ़ा रहा है। यह कभी भी अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान को जंग में खींच सकता है।
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एशिया में म्यांमार की सिविल वॉर लाखों लोगों को प्रभावित कर रही है और थमने का नाम नहीं ले रही। अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर डूरंड लाइन को लेकर तनाव चरम पर है। भारत-पाकिस्तान के बीच भी रिश्ते सामान्य नहीं होने का अनुमान है, जबकि ताइवान स्ट्रेट और साउथ चाइना सी में चीन का दबाव लगातार बना हुआ है।
अमेरिका के लिए सबसे बड़े खतरे
अमेरिका के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साइबर हमले का है। बिजली, बैंकिंग या कम्युनिकेशन सिस्टम पर कोई बड़ा अटैक पूरे देश को ठप कर सकता है। वेनेजुएला के अलावा हैती और मैक्सिको में बढ़ती अराजकता से प्रवासन और अपराध की लहर अमेरिका तक पहुंच सकती है। यहां तक कि अमेरिका के अंदर राजनीतिक हिंसा और अशांति का खतरा भी कम नहीं आंका जा रहा है।

नए उभरते खतरे भी कम नहीं हैं। आर्कटिक में रूस और चीन की सैन्य गतिविधियां नाटो को चुनौती दे रही हैं, जबकि कंबोडिया-थाईलैंड बॉर्डर पर पुराने विवाद फिर भड़क सकते हैं।
अब नए तरीके से लड़े जा रहे युद्ध
2025 ने सबसे बड़ा सबक दिया है कि अब ड्रोन्स और अनमैन्ड सिस्टम्स युद्ध का चेहरा बदल रहे हैं। यूक्रेन और मिडल ईस्ट की जंगों में ड्रोन्स के झुंड ने पारंपरिक एयर डिफेंस को बेकार साबित कर दिया। अब इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम पर कंट्रोल ही जीत तय करता है। जंग, स्पूफिंग और सुरक्षित कम्युनिकेशन अब सबसे अहम हो गए हैं।
इसलिए 2026 में देश काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स और डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स पर जोर दे रहे हैं। अमेरिका का ‘गोल्डन डोम’ और यूरोप का ‘स्काई शील्ड’ जैसे प्रोजेक्ट्स इसी दिशा में हैं, जो हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइल्स से भी बचाव करेंगे।




