दूसरों को खुश करने की कोशिश में कहीं आप खुद को तो नहीं भूल रहे? 5 शुरुआती संकेतों से करें पता

हम सभी चाहते हैं कि हमारे परिवार, दोस्त और आसपास के लोग खुश रहें। किसी की मदद करना या किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना बहुत अच्छी बात है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब हम दूसरों को खुश करने की कोशिश में अपनी ही जरूरतों और खुशियों को भूलने लगते हैं। इसे मनोविज्ञान में ‘पीपल प्लीजिंग’ कहा जाता है।

HighLights
- ‘ना’ कहने में डर लगना पीपल-प्लीजिंग का पहला संकेत है
- दूसरों की नाराजगी का डर मानसिक शांति को प्रभावित करता है
- अपनी जरूरतों को नजरअंदाज करना खुद के साथ नाइंसाफी है
क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपका मन किसी काम के लिए चीख-चीख कर ‘ना’ कह रहा हो, लेकिन जुबान से मुस्कुराहट के साथ सिर्फ ‘हां’ ही निकली? हम सब चाहते हैं कि लोग हमें पसंद करें और हमसे खुश रहें, लेकिन क्या दूसरों की ‘गुड बुक्स’ में रहने के चक्कर में आप अपनी ही कहानी के विलेन तो नहीं बन रहे?
बता दें, दूसरों को खुश रखना एक खूबी है, लेकिन जब यह आदत मजबूरी बन जाए, तो यह आपके मानसिक सुकून को दीमक की तरह खाने लगती है। अगर आपको लगता है कि आप सबके लिए ‘अच्छे’ बनते-बनते खुद के लिए ‘बुरे’ बन गए हैं, तो नीचे दिए गए 5 संकेतों (Signs of People Pleasing) को ध्यान से पढ़ें।

(Image Source: AI-Generated)
‘ना’ कहने में डर लगना
क्या आप उन कामों के लिए भी ‘हां’ कह देते हैं, जिन्हें आप नहीं करना चाहते या जिनके लिए आपके पास समय नहीं है? अगर ‘ना’ कहते समय आपको घबराहट होती है या आपको लगता है कि मना करने से आप बुरे बन जाएंगे, तो यह पहला और सबसे बड़ा संकेत है। याद रखें, अपनी सीमाओं का सम्मान करना स्वार्थी होना नहीं है।
दूसरों की नाराजगी का हमेशा डर रहना
अगर आप हर वक्त इसी चिंता में रहते हैं कि सामने वाला आपके किसी काम या बात से नाराज न हो जाए, तो आप खुद को भूल रहे हैं। दूसरों की राय को अपनी मानसिक शांति से ज्यादा अहमियत देना यह बताता है कि आप अपनी कद्र कम और दूसरों की परवाह ज्यादा कर रहे हैं।
अपनी जरूरतों को नजरअंदाज करना
क्या आप दूसरों के काम पूरे करने के चक्कर में अपना खाना, आराम या अपनी पसंद के काम छोड़ देते हैं? अगर आप अपनी सेहत और सुकून की कीमत पर दूसरों की मदद कर रहे हैं, तो यह समाज सेवा नहीं, बल्कि खुद के साथ नाइंसाफी है। आप खाली कप से किसी और का कप नहीं भर सकते।
हर बात पर माफी मांगना
क्या आप अक्सर उन चीजों के लिए भी ‘सॉरी’ बोलते हैं जिनमें आपकी कोई गलती नहीं होती? सिर्फ इसलिए माफी मांग लेना ताकि झगड़ा न हो या सामने वाला खुश रहे, यह दर्शाता है कि आप अपने आत्म-सम्मान के साथ समझौता कर रहे हैं।
अपनी असली भावनाओं को छिपाना
अगर आप अंदर से दुखी या गुस्से में हैं, लेकिन दूसरों के सामने जबरदस्ती मुस्कुराते रहते हैं, तो संभल जाएं। दूसरों को अच्छा महसूस कराने के लिए अपनी सच्ची भावनाओं को दबाना आपको मानसिक रूप से थका सकता है।
खुद को प्राथमिकता देना सीखें
दूसरों का ख्याल रखना अच्छी बात है, लेकिन इसकी शुरुआत खुद से होनी चाहिए। अगर आप ऊपर दिए गए संकेतों में खुद को पाते हैं, तो आज ही रुकें और सोचें। ‘ना’ कहना सीखें और खुद को भी उतना ही प्यार दें जितना आप दूसरों को देते हैं। जब आप खुश रहेंगे, तभी आप सही मायने में दूसरों को भी खुश रख पाएंगे।




