अंतर्राष्ट्रीय

एक जंग लगे जहाज के लिए आमने-सामने दुनिया की महाशक्तियां, आखिर अमेरिका, रूस और चीन क्यों हैं टकराने को तैयार?

अमेरिका ने रूस और वेनेजुएला से जुड़े एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया है, जिससे वैश्विक तनाव बढ़ गया है। रूस ने इसे अवैध बल प्रयोग बताया है, जबकि चीन ने अमेरिका पर दादागिरी का आरोप लगाया है। यह टैंकर कथित तौर पर ईरानी तेल के अवैध व्यापार में शामिल ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा था। रूस ने अपनी नौसेना तैनात कर जहाज की सुरक्षा का प्रयास किया था। इस घटना से अटलांटिक महासागर में सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है, जो अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन के लिए खतरनाक है।

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 अमेरिका की नौसेना की ओर से रूस और वेनेजुएला से जुड़े एक और तेल टैंकर को जब्त कर लिया। इसके बाद वैश्विक तनाव बढ़ गया है और दुनिया की महाशक्तियां आमने-सामने हैं। अमेरिका की हरकत पर रूस और चीन दोनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

रूस ने इस कदम को अवैध बल प्रयोग बताया है तो चीन ने वॉशिंगटन पर दादागिरी का आरोप लगाया है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर रूसी या चीनी युद्धपोत तेल शिपमेंट की एस्कॉर्टिंग शुरू करते हैं तो ये तनाव टकराव में बदल सकता है।

क्या है मामला?

एक जंग लगा जहाज अचानक से अमेरिका और रूस के बीच टकराव की बड़ी वजह बन गया। दरअसल, ये कोई आम जहाज नहीं है, बल्कि एक ऐसा टैंकर है जिस पर अवैध तेल व्यापार, प्रतिबंधों की अनदेखी और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के आरोप लगे हैं। यही कारण है कि मामला अब सीधे महाशक्तियों तक पहुंच गया है।

कई बार बदली टैंकर की पहचान

इस टैंकर की पहचान समय-समय पर बदलती भी रही है। पहले इसे बेला1 के नाम से जाना जाता था। इसके बाद इसे रूस के रजिस्टर में मैरिनेरा के नाम से दर्ज कराया गया। बात यहीं खत्म नहीं होती। इसकी पहचान बदलने के लिए जहाज पर रूस के झंडे को पेंट करा दिया गया।

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क्यों मचा है बवाल?

दरअसल, अमेरिका का आरोप है कि यह टैंकर उन शैडो फ्लीट जहाजों में शामिल था जो चोरी छिपे ईरान का तेल दुनिया भर में पहुंचाते हैं। यह सीधे-सीधे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन है।

बता दें कि शैडो फ्लीट ऐसे जहाजों का नेटवर्क है जो झंडा बदलते हैं, पहचान छिपाते हैं और ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके प्रतिबंधित देशों का तेल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते हैं। अमेरिकी कोस्ट गार्ड पिछले महीने से इस तरह के जहाजों पर नजर बनाए हुआ था और जब एक फ्लीट टैंकर वेनेजुएला से तेल ले जा रहा था, तब इसे पहली बार रोकने की कोशिश की गई।

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जब अमेरिकी फोर्स ने जहाज पर चढ़ने की कोशिश की तो क्रू ने इसकी अनुमति नहीं दी और अचानक से जहाज की दिशा बदलकर अटलांटिक महासागर की ओर रुख कर दिया। अमेरिकी कार्रवाई से बचने के लिए अचानक ही जहाज पर रूस का झंडा पेंट कर दिया गया।

रूस की एंट्री से बढ़ा तनाव

इसके बाद एंट्री होती है रूस की। जैसे ही जहाज यूरोप की ओर बढ़ा, रूस ने उसकी सुरक्षा के लिए पनडुब्बी और नौसेना तैनात कर दी। यह अमेरिका को सीधा संदेश था कि अब इस जहाज से दूर रहा जाए। ऐसे में मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि सैन्य टकराव की आशंका तक पहुंच गया है। साथ ही अटलांटिक महासागर में ये तनाव अपने चरम पर है।

कहां पर घेरा गया जहाज?

इस जहाज को आइसलैंड के दक्षिणी तट से करीब 190 मील दूर उत्तरी अटलांटिक महासागर में टैंकर को घेरा गया। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ब्रिटेन में अपने स्पेशल एयरक्राफ्ट और गनशिप तैनात किए। वी-22 ऑस्प्रे और एसी-130 गनशिप की तैनाती देखी गई है। बुधवार सुबह करीब 7 बजे अमेरिकी बलों ने जहाज पर धावा बोल दिया और उसे अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद से जहाज से संपर्क टूटा हुआ है।

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एनालिटिक्स फर्म केप्लर की अगर मानें तो जिस वक्त अमेरिका ने जहाज को अपने कब्जे में लिया उस वक्त उसमें तेल नहीं था। वहीं, अमेरिका का कहना है कि इसका इस्तेमाल अवैध सप्लाई के लिए होना था।

रूस ने कार्रवाई को बताया अवैध

रूस ने इस कार्रवाई को अवैध बताया है। उसका कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन है। जहाज पर रूसी नागरिक मौजूद थे। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने नागरिकों की तुरंत वापसी की मांग की है। रूस में इसे अपमान और उकसावे की कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

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क्यों खतरनाक है यह मामला?

यहां पर मुद्दा जहाज नहीं है बल्कि ईरान का तेल, अमेरिकी प्रतिबंध, रूस-चीन समर्थन और वैश्विक शक्ति संतुलन मुद्दा है। यहां पर एक गलत कदम सीधे अंतरराष्ट्रीय टकराव और सैन्य तनाव को जन्म दे सकता है। अटलांटिक महासागर तीन महाशक्तियों का सियासी अखाड़ा बन गया है।

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