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भिलाई खुर्द के ग्रामीणों का संघर्ष: विस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास पर सवाल

खदान विस्तार से बढ़ी चिंता
कोरबा जिले के भिलाई खुर्द क्रमांक–1 में खदान विस्तार योजना ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गई है। 50 से अधिक ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात कर SECL प्रबंधन और प्रशासन पर वादाखिलाफी और भेदभाव का आरोप लगाया।

ग्रामीणों की प्रमुख शिकायतें
ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और मूल निवासियों को उचित मुआवजा व पुनर्वास नहीं दिया जा रहा। उन्होंने बताया कि कई परिवार पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें बाहरी लोगों की तुलना में कम प्राथमिकता मिल रही है।

जमीन के वादे से मुकरा प्रबंधन
ग्रामीणों के अनुसार, SECL ने पहले प्रत्येक विस्थापित परिवार को 6-6 डिसमिल जमीन देने का आश्वासन दिया था। अब उस वादे के स्थान पर नकद मुआवजा देने की बात कही जा रही है, जो वास्तविक जरूरतों के मुकाबले बहुत कम है।

कट-ऑफ डेट बना विवाद का कारण
2023 को कट-ऑफ डेट मानकर किए गए सर्वेक्षण को ग्रामीणों ने अव्यवहारिक बताया है। उनका कहना है कि अधिग्रहण और भुगतान अब तक पूरा नहीं हुआ है, ऐसे में पुराने सर्वे के आधार पर विस्थापन करना अन्याय है।

पुनर्वास नीति पर सवाल
ग्रामीणों ने CIL R&R Policy 2012 और PMKKKY का हवाला देते हुए कहा कि नीति का उद्देश्य प्रभावित लोगों को बेहतर जीवन देना है, न कि उन्हें और अधिक संकट में डालना।

DMF की भूमिका पर उठे प्रश्न
ग्रामीणों ने कोरबा जिले में उपलब्ध DMF फंड का उपयोग पुनर्वास में न किए जाने पर नाराजगी जताई और इसे नियमों के खिलाफ बताया।

आगे की राह
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे इस मुद्दे को उचित मंचों पर उठाएंगे। वहीं ग्रामीणों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

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