गणतंत्र दिवस झांकी में गृह मंत्रालय ने दिखाए नए आपराधिक कानून, अमित शाह ने बताया न्याय प्रधान व्यवस्था का संकेत

गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि गणतंत्र दिवस परेड में उनके मंत्रालय की झांकी ने तीन नए आपराधिक कानूनों को प्रदर्शित किया। ये कानून औपनिवेशिक काल के अवशेषों को मिटाकर भारत को न्याय-प्रधान व्यवस्था की ओर ले जाते हैं। झांकी ने ई-साक्ष्य और ई-समन जैसी नई प्रणालियों को दर्शाते हुए नागरिकों के लिए त्वरित, सटीक और जन-केंद्रित न्याय व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया।
गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि गणतंत्र दिवस परेड में उनके मंत्रालय की झांकी में तीन नए आपराधिक कानूनों को प्रदर्शित किया गया, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में औपनिवेशिक काल के अवशेषों को मिटाने वाले ऐतिहासिक कानूनी सुधारों का प्रतीक है।
यह भारत को सजा पर जोर देने वाली व्यवस्था से न्याय-प्रधान कानूनी व्यवस्था की ओर ले जाने का भी संकेत है।
एक्स पर एक पोस्ट में शाह ने कहा कि झांकी ने ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति जैसी नई प्रणालियों को बखूबी प्रदर्शित किया। इसके जरिये नागरिकों को नए भारत में त्वरित, सटीक और जन-केंद्रित न्याय व्यवस्था के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
इस झांकी ने एक सदी में देश के आपराधिक कानून में हुए व्यापक बदलाव को प्रदर्शित किया, जिसमें तेज, तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित न्याय प्रणाली को अपनाया गया है।
बताते चलें, यह झांकी गृह मंत्रालय द्वारा 2024 में लागू किए गए तीन नए कानूनों-भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम पर आधारित थी, जिन्होंने ब्रिटिश काल के भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लिया।




