गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि 31 मार्च से पहले देश से माओवादी हिंसा का सफाया कर दिया जाएगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि 31 मार्च से पहले देश से माओवादी हिंसा का सफाया कर दिया जाएगा। उन्होंने सुरक्षा-केंद्रित रणनीति, बुनियादी ढांचे के विकास, वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने और पुनर्वास नीतियों को सफलता का श्रेय दिया।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च से पहले ही देश से माओवादी हिंसा का सफाया कर दिया जाएगा।
एक्स पर पोस्ट में लिखा कि सुरक्षा-केंद्रित रणनीति, बुनियादी ढांचे का विकास, माओवादियों के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने और पुनर्वास व आत्मसमर्पण जैसी नीतियों के सफल परिणाम मिले हैं।
स्पष्ट किया कि बस्तर में सुरक्षा बलों की बढ़ती सक्रियता ने माओवादियों की कमर तोड़ दी है। गृह मंत्री ने रविवार को नवा रायपुर में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को लेकर बैठक में समीक्षा की।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, माओवादी हिंसा प्रभावित राज्यों के डीजीपी व विभिन्न जांच एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए।
डबल इंजन सरकार माओवाद को करेगी समाप्त
गृह मंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार देश से माओवाद की समस्या को पूरी तरह समाप्त करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही।
अमित शाह ने आगे कहा, ‘कई पीढ़ियों को गरीबी और अशिक्षा के अंधकार में धकेलने वाले माओवाद से देश जल्द ही निजात पाने वाला है। माओवादियों के खिलाफ चल रही लड़ाई बिखरी हुई नहीं होनी चाहिए।’
गृह मंत्री ने कहा, ‘विभिन्न राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सुचारू समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शेष बचे माओवादियों को अन्य राज्यों में भागने नहीं दिया जाना चाहिए।’
अमित शाह ने आगे कहा, ‘जो छत्तीसगढ़ कभी माओवादी हिंसा का गढ़ था, भाजपा की डबल इंजन सरकार में विकास का पर्याय बन चुका है। यहां के युवा स्पोर्ट्स, फोरेंसिक व टेक्निकल एजुकेशन को गति देते हुए अपनी संस्कृति व परंपराओं को भी सहेज रहे हैं।’
अमित शाह ने बताए सफलता के चार मंत्र
- सुरक्षा-केंद्रित रणनीति: सुरक्षा बलों द्वारा आक्रामक और सटीक आपरेशन किया गया।
- बुनियादी ढांचे का विकास: माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों और संचार की सुविधा।
- वित्तीय नेटवर्क पर प्रहार: माओवादियों को मिलने वाली फं¨डग के रास्तों को बंद करना।
- बेहतर आत्मसमर्पण नीति: माओवादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रभावी योजनाएं।
मारे गए पांच सौ से अधिक माओवादी
आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पिछले दो साल में 500 से अधिक माओवादी ढेर हुए, इनमें बसवराजू जैसे बड़े हिंसक शामिल हैं। कई अभियानों के दौरान 1,900 माओवादी पकड़े गए। सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर 2,500 माओवादियों ने हथियार छोड़े।




