स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री ही नहीं समर्थन में आए संतों को भी दी खुद को हिंदू साबित करने की चुनौती

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके समर्थकों को खुद को हिंदू साबित करने की चुनौती दी है। उन्होंने 11 मार्च को लखनऊ में होने वाले मार्च की रणनीति 1 मार्च को तय करने की बात कही। भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि पूजा हमारी परंपरा है। यह मुद्दा वाराणसी में राजनीतिक माहौल गरमा रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन रहा है।
HighLights
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी को हिंदू साबित करने की चुनौती।
- भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने आरोपों का खंडन किया, परंपरा बताया।
- लखनऊ में 11 मार्च के मार्च पर सबकी निगाहें टिकीं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी है कि वे खुद को हिंदू साबित करें। उन्होंने उन संतों को भी इस चुनौती में शामिल किया है, जो उनके समर्थन में बोलते हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगामी 11 मार्च को लखनऊ में होने वाले मार्च की रणनीति एक मार्च को तय करने की बात कही है।
इसके साथ ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ब्रजेश पाठक को शक्ति विहीन डिप्टी सीएम बताते हुए कहा कि दबाव में वह बटुकों का सम्मान कर रहे हैं। कहा कि ब्रजेश पाठक ने जिस तरह से “महापाप लगेगा” कहकर सब कुछ ईश्वर पर छोड़ा है, इससे स्पष्ट होता है कि वह कार्रवाई नहीं कर सकते, वह कमजोर हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि डिप्टी सीएम ने बटुकों का पूजन कर अपनी भावना दिखाई है। उन्होंने यह बताया है कि मेरे और बटुकों के साथ गलत हुआ है, लेकिन क्या उनके यह करने से शांति हो जाएगी? आप किसी को मारते हो और फिर उसके ऊपर फूल चढ़ाते हो यह कैसे होता है। यह व्यक्ति एक महीने तक चुप रहता है और अब ऐसे बोलता है जैसे हिचकी आ रही है। यह हो सकता है उसके समाज का दबाव उसके वोटर का दबाव हो। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से किए जा रहे अपमान और बार-बार इस तरह की चीजों से उनकी पार्टी के लोग नाराज हैं। सैकड़ो लोगों ने व्यक्तिगत रूप से क्षमा मांगी, कुछ लोगों ने आज पार्टी छोड़कर हमसे क्षमा मांगी है।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि जिन लोगों ने अमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर लाठी-डंडों से हमला किया था, वे अब उनके हितैषी बन गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने गोलियां चलाकर सरयू के जल को कारसेवकों के रक्त से लाल किया, वे भी इस मामले में बोलने का साहस कर रहे हैं। प्रेम शुक्ला गुरुवार को सारनाथ में भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे।
मीडिया ने उनसे उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा बटुकों का सम्मान करने के संदर्भ में सपा नेता शिवपाल यादव के नाटक करने की टिप्पणी पर सवाल किया। इस पर प्रेम शुक्ला ने कहा कि पूजा हमारी परंपरा का हिस्सा है और यह पहली बार नहीं हुआ है। उपमुख्यमंत्री बटुकों का पूजन करते रहे हैं और यह परंपरा पहले भी चली आ रही है।
प्रयागराज में बटुकों के साथ हुई ज्यादती के मामले में प्रेम शुक्ला ने कहा कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को सुधारने के लिए यदि कोई घटना हुई है, तो उसकी जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा हमेशा बटुकों के सम्मान में विश्वास रखती है और यह सम्मान किसी नाटक का हिस्सा नहीं है।
वहीं काशी में अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की चुनौती और भाजपा के प्रवक्ता के बयान ने वाराणसी में राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। यह स्पष्ट है कि धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर संतों और नेताओं के बीच की खींचतान आगे बढ़ रही है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह कदम न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्रदेश के बाहर अब देश भर में चर्चा बटोर रही है।
वाराणसी में चल रही यह बहस न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो चुकी है। सभी की निगाहें 11 मार्च के मार्च पर टिकी हुई हैं, जो इस मुद्दे पर और भी अधिक रोशनी डाल सकता है। स्वामी अमुक्तेश्वरानंद की चुनौती और भाजपा के प्रवक्ता के बयान ने वाराणसी में एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है, जो आगे चलकर और भी महत्वपूर्ण मोड़ ले सकती है। वहीं भाजपा पदाधिकारी भी काउंटर के लिए लगातार सामने आ रहे हैं।




