राजनीति

बंगाल चुनाव: जिसने राजवंशी समुदाय को साधा उसे ही मिली जीत, कूचबिहार में 2021 में भाजपा की बढ़ी ताकत

कूचबिहार में राजवंशी समुदाय के मतदाता चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। जिले की 40-50% आबादी राजवंशी है, और उत्तर बंगाल में भी इनका खासा प्रभाव है।

HighLights

  1. कूचबिहार में राजवंशी समुदाय का वोट निर्णायक होता है।
  2. 2021 में भाजपा ने राजवंशी समर्थन से 6 सीटें जीतीं।
  3. उत्तर बंगाल की 12-13 विधानसभा सीटों पर राजवंशी प्रभाव।

 बंगाल के उत्तरी भाग में हिमालय की तलहटी में बसे कूचबिहार को राजाओं का शहर कहा जाता है। कूचबिहार जिले की नौ विधानसभा सीटों को जीतने के लिए भाजपा और तृणमूल समेत सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन बाजी किसके हाथ आएगी यह राजवंशी समुदाय के मतदाता तय करेंगे।

भौगोलिक तौर पर कूचबिहार की सीमा एक ओर असम से तो दूसरी ओर पड़ोसी देश बांग्लदेश से लगती है। यह राजवंशी समुदाय बहुल जिला है। यहां की कुल आबादी में 40 से 50 फीसदी राजवंशियों की है। कहा जाता है कि राजवंशी मतदाता जिधर जाएंगे, जीत उनकी ही होगी।

कितनी सीटों पर है प्रभाव?

राजवंशी समुदाय से आने वाले पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निशिथ प्रमाणिक भाजपा के टिकट पर नाटाबाड़ी से चुनाव लड़ रहे हैं। राजवंशी समुदाय को साधने के लिए ही भाजपा ने अनंत महाराज उर्फ नगेंद्र राय को भी राज्यसभा का सदस्य बनाया है। वह भी राजवंशी समुदाय से आते हैं। पूरे उत्तर बंगाल की बात करें तो करीब 50 लाख राजवंशी यहां रहते हैं।

उत्तर बंगाल की कुल 54 विधानसभा सीटों में से करीब 12-13 पर इनका प्रभाव माना जाता है। वर्ष 2021 विधानसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा ने जिले की नौ में से छह सीटों पर कब्जा किया। इससे पहले 2011 के विधानसभा चुनाव में फारवर्ड ब्लाक और तृणमूल कांग्रेस ने यहां से 4-4 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को भी एक सीट मिली थी। उस दौर में भाजपा यहां शून्य थी।

यह वह समय था जब तृणमूल कांग्रेस ने वाममोर्चा के 34 वर्षों के शासन का अंत कर दिया। 2016 के विधानसभा चुनाव को देखें तो तृणमूल कांग्रेस ने नौ में से आठ सीटें जीती थीं, जबकि वाम मोर्चा के घटक दल फारवर्ड ब्लाक को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा था। उसके बाद भाजपा ने राजवंशी वोट बैंक पर फोकस किया।

तृणमूल के नेता रहे निशिथ प्रमाणिक को भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले लेकर आई और 2021 के चुनाव में बाजी मार ले गई। नौ में से छह सीटें जीत गई। इस तरह से 10 सालों में भाजपा शून्य से 10 सीट पर पहुंच गई।

2019 में लोकसभा सीट पर भी कब्जा

2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने यहां की एकमात्र सीट पर कब्जा किया था। कूचबिहार लोकसभा सीट से निशिथ ने जीत दर्ज की थी। तब उन्हें पुरस्कार के तौर पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बना दिया गया था। उनके केंद्रीय मंत्री बनने से 2021 के चुनाव राजवंशियों ने भाजपा की झोली वोटों से भर दी।

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में यह सीट भाजपा के हाथ से खिसककर तृणमूल के पास चली गई। तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जगदीश चंद्र बसुनिया से निशिथ हार गए थे। वह भले ही चुनाव हार गए, लेकिन तब तक भाजपा ने यहां अपनी ताकत इतनी ताकत बढ़ा ली थी कि वह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को आंख दिखा सके।

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