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जब जाम में फंसा पीएम का काफिला, वायुसेना के पहले हेलीकॉप्टर ने किया रेस्क्यू; जानें सिकोरस्की S-55 की कहानी

भारतीय वायुसेना को 1954 में अपना पहला हेलीकॉप्टर, अमेरिकी सिकोरस्की एस-55 मिला। प्रधानमंत्री नेहरू ने इसमें अपनी पहली यात्रा की और एक बार जाम में फंसने पर इसी से रेस्क्यू हुए।

1950 के दशक की शुरुआत में हेलीकॉप्टरों का दौर शुरू हुआ। भारतीय सेना और वायुसेना ने आधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भारतीय वायुसेना ने 1954 में अपना पहला हेलीकॉप्टर प्राप्त किया, जो अमेरिकी कंपनी सिकोरस्की एयरक्राफ्ट द्वारा निर्मित सिकोरस्की एस-55 था।

मार्च 1954 में यह हेलीकॉप्टर समुद्री मार्ग से मुंबई पहुंचा। मात्र पांच दिनों के भीतर इसे असेंबल किया गया, ग्राउंड और फ्लाइट टेस्ट पूरे किए गए। 25 मार्च को इसे दिल्ली लाया गया। यह भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।

पीएम नेहरू का पहला हेलीकॉप्टर सफर

इस हेलीकॉप्टर को सेवा में लगाने में देर नहीं लगी। 28 मार्च 1954 को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसमें सफर किया। उन्हें पालम एयरपोर्ट से तिलपत रेंज तक ले जाया गया, जहां वायुसेना की 21वीं वर्षगांठ पर एक भव्य एयर शो और फायर पावर डेमो आयोजित हो रहा था। नेहरू जी को वापस भी इसी हेलीकॉप्टर से पालम लाया गया।

यह हेलीकॉप्टर एक बार तिलपत में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भारी भीड़ के कारण सड़कें जाम हो गईं और नेहरू जी की कार बीच रास्ते में फंस गई। स्थिति बिगड़ती देख वायुसेना ने तुरंत इस हेलीकॉप्टर को भेजा और प्रधानमंत्री को सुरक्षित रूप से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाया।

आपदा में बना सहारा

इसके अलावा, 1954 में ही यमुना नदी में आई भयंकर बाढ़ के दौरान इस हेलीकॉप्टर ने राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाई। एक मिशन में इसने 15 लोगों की जान बचाई। एक समाचार पत्र ने इसे मुसीबत में मित्र कहा, जो बाद में भारतीय वायुसेना की सभी हेलीकॉप्टर यूनिटों का आदर्श वाक्य बन गया।

पहली हेलीकॉप्टर यूनिट का गठन

1958 में भारतीय वायुसेना ने अपनी पहली समर्पित हेलीकॉप्टर यूनिट नंबर 104 हेलीकॉप्टर यूनिट की स्थापना की। सिकोरस्की एस-55 इसी यूनिट का आधार बना। कुल मिलाकर, 1954 से 1957 के बीच वायुसेना ने पांच ऐसे हेलीकॉप्टर प्राप्त किए, जिनमें कुछ एस-55सी मॉडल भी शामिल थे।

करीब 12 वर्षों तक सक्रिय सेवा देने के बाद 1966 में इन हेलीकॉप्टरों को रिटायर कर दिया गया। लेकिन इनकी शुरुआत ने भारतीय वायुसेना में रोटरी-विंग एयरक्राफ्ट के युग की नींव रखी।

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