पाकिस्तान बना मध्यस्थ? अमेरिका-ईरान तनाव के बीच नई कूटनीतिक पहल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच शहबाज शरीफ ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेलते हुए पाकिस्तान को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता स्थल के रूप में पेश किया है। इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
पाकिस्तान की पेशकश और उसका महत्व
शहबाज शरीफ ने कहा कि अगर दोनों देश तैयार हों, तो पाकिस्तान सार्थक और परिणामदायी बातचीत की मेजबानी करने को तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में संघर्ष की आशंकाएं बढ़ रही हैं।
अमेरिका का संकेत
सूत्रों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने सैद्धांतिक रूप से इस प्रस्ताव को खारिज नहीं किया है। ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर शरीफ के संदेश को साझा करना इस दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
ईरान का विरोधाभासी रुख
जहां एक ओर अब्बास अराघची का कार्यालय कूटनीतिक संपर्कों की पुष्टि करता दिखा, वहीं मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने बातचीत की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
गुप्त कूटनीति और चुनौतियां
सूत्र बताते हैं कि वार्ता की खबर लीक होने से बैकचैनल बातचीत जटिल हो गई है। पाकिस्तान, मिस्र और खाड़ी देशों के बीच लगातार संपर्क जारी है।
सेना और खुफिया की भूमिका
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भी अमेरिकी पक्ष से संपर्क किया है। वहीं ISI और अमेरिकी दूतों के बीच बातचीत जारी है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान की यह पहल क्षेत्रीय कूटनीति में उसकी भूमिका को मजबूत कर सकती है, लेकिन ईरान की अनिश्चित स्थिति इस प्रक्रिया को कठिन बना रही है।




