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संकट में बादशाह: अल्फ़ोंसो आमों की दुर्दशा

माल्दा, 25 अप्रैल 2024। भारतीय फल उद्योग का एक प्रमुख हिस्सा माने जाने वाले अल्फोंसो आम, जिन्हें आमों का बादशाह कहा जाता है, इस बार गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। महाराष्ट्र के रत्नागिरी और कोल्हापुर के साथ-साथ मलवण क्षेत्र में उगाए जाने वाले इस आम की बंपर पैदावार और बढ़ती मांग के बावजूद किसानों और व्यापारियों की चिंता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

हाल के वर्षों में अल्फोंसो आम की भूमिका खाद्य उद्योग में काफी महत्वपूर्ण हो गई है। इसके मीठे स्वाद और खुशबू की वजह से यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में चलन में रहता है। हालांकि, इस बार की फसल में प्राकृतिक आपदाओं और संक्रमण की मार से उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे बाजार में कीमतें अस्थिर हो गई हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वर्ष में मॉनसून की अनियमितता और अप्रत्याशित बरसात ने फलोत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। इसके अतिरिक्त, किसान आरोप लगा रहे हैं कि उचित सरकारी सहायता नहीं मिल पाने के कारण वे आर्थिक तंगी में फंसे हुए हैं।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि किसानों को बेहतर बीज, उर्वरक तथा सिंचाई सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं, लेकिन धीमी प्रगति के कारण समस्या बढ़ती दिखाई दे रही है। व्यापारी भी अपनी तरफ से लागत बढ़ने से चिंतित हैं और आशंका जता रहे हैं कि इस बार निर्यात प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अल्फोंसो आमों को संकट से निकालने के लिए आवश्यक है कि किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों से परिचित कराया जाए और वित्तीय सहायता के साथ-साथ बेहतर विपणन रणनीतियां अपनाई जाएं। साथ ही, मौसम पूर्वानुमान पर आधारित तैयारी आवश्यक है ताकि उत्पादन में स्थिरता लाई जा सके।

हालांकि अल्फोंसो आम की अहमियत को देखते हुए, राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर समाधान खोजने की दिशा में प्रयासरत हैं, किंतु असल सफलता तभी मिलेगी जब सभी हितधारकों—किसान, व्यापारी, वैज्ञानिक और प्रशासन एक साथ हाथ मिलाकर काम करें। फलों के इस बादशाह को संकट से बाहर निकालने के लिए सामूहिक प्रयासों की सख्त जरूरत है।

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