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मुकेश छाबड़ा ने ‘रामायण’ और ‘धुरंधर’ के प्रति नकारात्मकता पर खोला दिल

मुंबई: प्रसिद्ध कैस्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने हाल ही में बड़े बजट की फिल्मों ‘रामायण’ और ‘धुरंधर’ के इर्द-गिर्द फैली नकारात्मकता पर अपनी चिंता व्यक्त की है। छाबड़ा ने इस बात पर अफसोस जताया कि ऑनलाइन ट्रोलिंग की वजह से कई बार परियोजनाओं को रिलीज से पहले ही निशाना बनाया जाता है, जबकि आलोचनाएं अक्सर देखने के बाद घट जाती हैं।

मुकेश छाबड़ा ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में नकारात्मकता का माहौल बनना चिन्ताजनक है। कई बार सामाजिक मीडिया और इंटरनेट प्लेटफार्मों पर बिना पूरी जानकारी या फिल्म देखे ही गम्भीर, अतार्किक टिप्पणियां कर दी जाती हैं, जो न केवल फिल्म निर्माताओं के लिए हतोत्साहजनक होती हैं, बल्कि दर्शकों में भी भ्रम फैलाती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘रामायण’ और ‘धुरंधर’ जैसे महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में कलाकारों और तकनीशियनों की कड़ी मेहनत छुप नहीं सकती। एक अच्छी फिल्म को अपनी जगह जरूर मिलेगी, और दर्शक अंततः गुणवत्तापूर्ण कंटेंट की कदर करते हैं।

मुकेश छाबड़ा ने फिल्म उद्योग की स्थिरता और दृढ़ता पर भरोसा जताते हुए कहा कि चाहे कोई भी चुनौती क्यों न आए, भारतीय सिनेमा हमेशा संघर्षों से उबरकर आगे बढ़ता रहेगा। वे उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में निर्माता, कलाकार और दर्शक मिलकर एक सकारात्मक और स्वस्थ सिनेमाई माहौल बनाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिल्म रिलीज़ से पहले बढ़ती ट्रोलिंग और नकारात्मक बहसों से बचने के लिए संपूर्ण और न्यायसंगत समीक्षा पद्धति अपनाना आवश्यक है। यह न केवल निर्माताओं के उत्साह को बढ़ाएगा बल्कि दर्शकों को भी बेहतर विकल्प चुनने में सहायक होगा।

इस पूरी बहस के बीच मुकेश छाबड़ा की राय से यह साफ़ होता है कि अच्छे कंटेंट की जितनी भी आलोचना हो, वह अंततः अपनी पहचान बनाने में सफल रहता है। फिल्म प्रेमी, कलाकार और निर्माता मिलकर एक ऐसी संस्कृति का निर्माण करें, जहां सम्मान और रचनात्मकता को बढ़ावा मिले।

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