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उपभोक्ता मांग है उत्पादों और सेवाओं के हरितकरण में महत्वपूर्ण कारक: पीयूष गोयल

नई दिल्ली: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में उत्पादों और सेवाओं के हरितकरण में उपभोक्ता मांग की भूमिका को अहम बताया है। गोयल ने कहा कि उपभोक्ता के प्राथमिकता देना ही कंपनियों को पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य प्रस्ताव बनाना भी उतना ही जरूरी है।

मंत्री ने कहा, “उपभोक्ता की मांग हरित उत्पादों की दिशा में कारोबार को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाती है। जब उपभोक्ता हरित और टिकाऊ विकल्प चुनेंगे तो कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए अग्रसर होंगी। इसके अलावा, कंपनियों को ऐसी पहल करनी चाहिए जो आर्थिक रूप से व्यावहारिक और टिकाऊ हों।”

उन्होंने बताया कि हरित उत्पादों और सेवाओं का विकास केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए नहीं बल्कि आर्थिक स्थिरता तथा सामाजिक जिम्मेदारी के लिए भी आवश्यक है। मंत्री के अनुसार, दोनों पहलुओं का संतुलन ही दीर्घकालीन सफलता की कुंजी है।

पीयूष गोयल ने सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां और पहल शुरू की गई हैं जो व्यवसायों को पर्यावरण-संबंधी उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने बताया कि निवेशकों और उपभोक्ताओं की बढ़ती जागरूकता ने कॉर्पोरेट जगत को भी इस दिशा में सक्रिय कर दिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को कारगर बनाने के लिए आवश्यक है कि उपभोक्ता न केवल जागरूक हों, बल्कि अपने खरीद निर्णयों में भी हरित विकल्पों को प्राथमिकता दें। यह मांग कंपनियों को अपनी उत्पादन प्रणाली को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ढालने के लिए मजबूर करेगी।

गोयल ने अंत में कहा, “हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाएं। उपभोक्ता से लेकर उद्योग जगत तक सबका योगदान इस बदलाव के लिए अनिवार्य है। आर्थिक रूप से व्यवहार्य और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाना ही भविष्य की राह है।”

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