खेल
दिग्विजय एकादश और तियरा स्टेडियम की टीम ने हॉकी खेल उत्सव में शानदार प्रदर्शन करते हुए विजय प्राप्त की।

“मैं एंजल हूँ… आज भी याद है वो सुबह। मैदान की मिट्टी में हल्की ठंडक थी और मेरे हाथों में हॉकी स्टिक थरथरा रही थी। सामने आदर्श इंटर कॉलेज की टीम थी, और हमारे कोच ने बस इतना कहा था — ‘दिल से खेलना।’
पहली सीटी बजी, और मैं दौड़ पड़ी। हर पास, हर ड्रिबल में लगा कि वक्त थम गया है। जब गेंद नेट में गई, तो मुझे सिर्फ एक आवाज़ सुनाई दी — भीड़ की तालियाँ।
उस दिन हम जीते, लेकिन असली जीत तो मेरे भीतर हुई। अब मैं जानती हूँ कि मैदान सिर्फ खेल का नहीं, आत्मविश्वास का भी होता है।
आज जब कोई छोटी बच्ची हॉकी उठाती है, तो मुझे लगता है — हाँ, सोनभद्र की उस सुबह ने कुछ बदल दिया।”




