सम्पादकीय

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह स्कूलों में नाबालिग बच्चों के मोबाइल उपयोग पर रोक के लिए नियम तैयार करे।

बीकानेर जिले के गोडू गांव में जो हुआ, उसने इंसानी रिश्तों की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए। किसी ने सोचा नहीं था कि एक बेटा अपने ही पिता का खून कर देगा। 78 वर्षीय गोपीराम बिश्नोई, उम्रदराज़ होने के बावजूद, अपने छोटे बेटे योगराज के साथ रहते थे। परिवार के बाकी सदस्य अलग रहते थे, लेकिन योगराज के साथ उनका रिश्ता कमजोर होता गया। छोटी-छोटी बातों पर विवाद होता था, और यही विवाद आखिरकार मौत तक पहुंच गया।

27 नवंबर की सुबह भी कुछ ऐसा ही हुआ। पिता-पुत्र के बीच कहासुनी हुई और बात बढ़ती गई। गुस्से में अंधे बने योगराज ने कुल्हाड़ी उठाई और पिता के सिर पर वार कर दिया। शांति से रहने वाले बुजुर्ग गोपीराम वहीं ढेर हो गए। जिस बेटे को उन्होंने जीवन दिया, उसी ने उन्हें मौत दे दी।

जब मृतक की पत्नी घर लौटी, तो उसने पति को ज़मीन पर पड़ा देखा। सिर पर गंभीर चोट देखकर उसने अंदाजा लगाया कि हमला हुआ है, लेकिन बेटे पर शक करने की हिम्मत नहीं हुई। दुखी मन से परिवार ने शव को दफना दिया, बिना किसी रिपोर्ट के।

लेकिन सच ज्यादा देर तक छिप नहीं पाया। गांव के ही एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि हत्या है। पुलिस आई, शव निकलवाया और जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि हत्या धारदार हथियार से हुई थी। पुलिस ने योगराज से पूछताछ की तो वह टूट गया और सबकुछ कबूल कर लिया।

बड़े बेटे ख्यालीराम ने पुलिस में छोटे भाई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने बताया कि योगराज अक्सर पिता के साथ झगड़ा करता था। जमीन-जायदाद को लेकर तनाव चलता रहता था।

गांव में लोग कहते हैं — यह सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि विश्वास, अपनापन और संस्कारों की भी हत्या है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button