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शोहरत से पहले ताने, स्टारडम के बाद तन्हाई, Elvis Presley की अनसुनी कहानी

कई बार सफर जितना कठिन हो, सफलता उतनी ही शानदार होती है। ऐसी ही कहानी है सिंगर-एक्टर डांसर और मल्टीटैलेंटेड एल्विस प्रेस्ली की, जिनका जिंदगी ने समय-समय पर इम्तिहान लिया, लेकिन उन्होंने कई तानों को सुनकर वह शोहरत कमाई, जो बहुत ही कम सिंगर्स को मिलती है। उनकी बर्थ एनिवर्सरी के खास मौके पर पढ़ें, उनकी जिंदगी की अनसुनी दिलचस्प कहानी:

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HighLights

  1. 8 जनवरी को है इंटरनेशनल सिंगर एल्विस प्रेस्ली का जन्मदिन
  2. स्कूल में तानों से लेकर शोहरत पाने तक का दिलचस्प सफर
  3. पूरे करियर में गाए 700 से ज्यादा गाने

 कुछ सिंगर्स ऐसे होते हैं, जिनकी आवाज सीधा दिल में उतरती है। कुछ हस्तियां ऐसी होती हैं कि भले ही वह हमारे बीच हो ना हो, लेकिन उनके काम के जरिए वह हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत थे मशहूर सिंगर और एक्टर ‘एल्विस प्रेस्ली’, जिन्हें उनके फैंस ‘किंग ऑफ रॉक एंड रोल’ के नाम से पुकारते हैं।

कम उम्र में सिंगिंग, एक्टिंग और डांस की दुनिया में नाम कमाने वाले एल्विस प्रेस्ली की जिंदगी कभी-कभी आसान नहीं रही। वक्त-वक्त पर जिंदगी ने उनकी परीक्षा ली। महज 42 साल की कम उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले एल्विस प्रेस्ली की आज बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर जानिए उनके बारे में कुछ रोचक बातें:

गरीब परिवार में हुआ था एल्विस प्रेस्ली का जन्म

एल्विस प्रेस्ली का 8 जनवरी साल 1935 में टुपेलो, मिसिसिपी में हुआ था। हालांकि, बाद में उनका पूरा परिवार मेम्फिस, टेनेसी में बस गया था। गरीब फैमिली में जन्मे एल्विस प्रेस्ली का एक जुड़वा भाई भी था, जिसका निधन जन्म के कुछ समय बाद ही हो गया था। प्रेस्ली अपनी मां के काफी करीब रहे थे। वह अक्सर उनके साथ चर्च की प्रेयर्स में शामिल होते थे। चर्च ही वह जगह थी, जहां से एल्विस प्रेस्ली की म्यूजिक की तरफ रूचि बढ़ी थी।

गरीबी के कारण एल्विस प्रेस्ली के पिता वर्नोन को जो भी काम मिलता वह ले लेते। सिंगर और उनके परिवार को अक्सर अपनी रोजी रोटी के लिए पड़ोसियों और सरकार से मिल रहे खाने पर आश्रित रहना पड़ता था। साल 1938 में एल्विस प्रेस्ली के पिता को चेक में हेराफेरी की वजह से दोषी पाया गया, जिसकी वजह से न सिर्फ उन्हें जेल हुई, बल्कि उन्होंने अपना घर भी खो दिया।

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10 साल की उम्र में मिला पहला गिटार

साल 1941 में एल्विस प्रेस्ली का ईस्ट टुपेलो कंसोलिडेटेड स्कूल में पहली क्लास में दाखिला हुआ। उनकी टीचर ने उन्हें एवरेज स्टूडेंट समझा। हालांकि, साल 1945 वह साल था, जब उन्होंने सबका नजरिया बदल दिया। महज 10 साल की उम्र में उन्होंने मिसिसिपी अलबामा फेयर और डेयरी शो में एक सिंगिंग कांटेस्ट में भाग लिया, जहां उन्होंने ‘ओल्ड शीप’ गाया और वह उस कांटेस्ट में पांचवें नंबर पर आए। कुछ महीनों के बाद प्रेस्ली को उनके जन्मदिन पर पहला गिटार मिला, जहां उन्होंने फैमिली चच में जाकर अपने दो अंकल से उसे बजाना सीखा।

साल 1946 में उनका दाखिला मिलाम में हुआ, उस वक्त वह छठी क्लास में थे। वह स्कूल में गिटार बजाते और गाना गाते थे। उन्हें अक्सर लोकल संगीत बजाने के लिए ‘बेकार’ बच्चा कहकर स्कूल में स्टूडेंट्स बुली करते थे। प्रेस्ली की दिलचस्पी मिसिसिपी स्लिम रेडियो शो में थी। स्लिम के छोटे भाई एल्विस प्रेस्ली के क्लासमेट थे, जो उन्हें संगीत का दीवाना बताते थे। हालांकि, उन्होंने ही उन्हें कॉर्ड्स की टैक्निक सिखाई। जब एल्विस महज 12 साल के थे, तो स्लिम उन्हें अपने दो ऑनएयर शो का हिस्सा बनाया, जिसकी वजह से उनका स्टेज फीयर खत्म हुआ।

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18 साल की उम्र में पहला गाना किया रिकॉर्ड

साल 1953 में अगस्त का वह महीना, जिसने एल्विस प्रेस्ली की जिंदगी को बदल कर रख दिया। मेम्फिस के सन स्टूडियो में एल्विस ने अपनी मां के लिए पहला गाना ‘माय हैप्पीनेस’ रिकॉर्ड किया। जिस भाव से एल्विस ने ये गाना गाया, स्टूडियो के असिस्टेंट मैरियन कीस्कर भी हैरान रह गए और उन्होंने सैम फिलिप्स को बताई। साल 1954 में फिलिप्स ने उन्हें जिमी स्वीनी के गाने ‘विदआउट यू’ ट्रायल के लिए इस उम्मीद से बुलाया कि वह उनके स्टाइल और पर्सनैलिटी को सूट करेगा, लेकिन प्रेस्ली उस गाने के साथ जस्टिस नहीं कर पाए।

हालांकि, फिलिप्स ने एल्विस पर गिवअप नहीं किया और उन्होंने गिटारिस्ट ‘स्कॉटी मूर’ और ‘बिल ब्लैक’ के साथ स्टूडियो में रिकॉर्डिंग सेशन के लिए इनवाइट किया। जब दोनों अपने घर जाने लगे, तो प्रेस्ली ने ‘दैट्स ऑल राइट’ बजाया और उसे गाने लगे और जंप करने लगे। फिलिप्स ने गाना रिकॉर्ड किया। आगे चलकर ये इतना पॉपुलर हुआ कि मेम्फिस के डिस्क जॉकी उसे लगातार अपने रेड, हॉट और ब्लू शो में बजाने लगे। जिसके बाद प्रेस्ली का इंटरव्यू हुआ और महज 21 साल की उम्र में वह एक बड़े इंटरनेशनल स्टार बन गए।

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आर्मी में शामिल होकर की सेवा

21 साल की उम्र में सफलता हासिल करने वाले एल्विस प्रेस्ली को 1958 में यूएस सेना ने आर्मी में शामिल किया। सफल करियर के बावजूद उन्होंने किसी भी स्पेशल ट्रीटमेंट की डिमांड नहीं की और जर्मनी में एक आम सैनिक की तरह सेवा की। आर्मी में रहकर उन्हें बेहद सम्मान मिला। जब वह आर्मी में थे, तो उस दौरान उनकी मां का निधन हो गया था, जिससे वह पूरी तरह से टूट गए थे।

1960 में वह आर्मी से लौटे और उन्होंने एक बार फिर से म्यूजिक की दुनिया में कमबैक किया। उन्होंने ‘ब्लू हवाई’ और ‘जी आई ब्लू’ जैसी फिल्में भी की।

तीन बार जीता ग्रेमी अवॉर्ड

एल्विस प्रेस्ली एक ऐसे सिंगर थे, जिन्हें महज 36 साल की उम्र में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। अपने पूरे करियर में 700 से अधिक गाने गा चुके एल्विस प्रेस्ली को तीन बार ग्रेमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उनके फेमस गानों में ‘मूडी ब्लू’, ‘प्रॉमिस लैंड’ और ‘पैराडाइज’ जैसे गाने शामिल हैं।

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42 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

16 अगस्त 1977 उनके फैंस के लिए वह काला दिन था, जब उन्होंने अपने फेवरेट एल्विस प्रेस्ली को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया। दरअसल, एल्विस को अपने एक शो के लिए मेम्फिस से पोर्टलैंड जाना था, जिसके लिए वह तैयार होने बाथरूम में गए। जब उनकी मंगेतर वहां उनके मेंशन ग्रेसलैंड पहुंची तो उन्होंने सिंगर को बाथरूम के फर्श पर बेहोशी की हालत में पाया। जब वह काफी समय तक होश में नहीं आए, तो उन्हें बैपटिस्ट मेमोरियल अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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