स्काउट गाइड अध्यक्ष पद विवाद पर हाईकोर्ट की सुनवाई, सरकार को नोटिस

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा दायर याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह याचिका स्काउट गाइड संगठन के अध्यक्ष पद से जुड़े विवाद को लेकर दायर की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए राज्य शासन और अन्य संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को निर्धारित की गई है।
बिना जानकारी हटाने का आरोप
याचिकाकर्ता सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कोर्ट के समक्ष यह आरोप लगाया कि उन्हें स्काउट गाइड के अध्यक्ष पद से हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह एकतरफा और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि न तो उन्हें इस संबंध में कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिला। उनके अनुसार, यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है, जिसमें किसी भी व्यक्ति को सुने बिना उसके खिलाफ निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।
वैधानिक अध्यक्ष होने का दावा
बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी याचिका में यह भी उल्लेख किया है कि वे लंबे समय से स्काउट गाइड संगठन से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में भी परिषद के वैधानिक अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि 5 जनवरी को उन्होंने अध्यक्ष के रूप में जंबूरी की बैठक भी ली थी। इसके बावजूद, उनके बिना जानकारी दिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे उनकी भूमिका और अधिकारों की अनदेखी हो रही है।
अध्यक्ष पद को लेकर बढ़ता टकराव
स्काउट गाइड संगठन के अध्यक्ष पद को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। दोनों नेता इस पद पर अपना दावा कर रहे हैं। इसी दावे और प्रतिदावे के कारण संगठन के भीतर असमंजस और अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है, जिसका असर संगठन की गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।
आयोजन स्थल बदलने पर आपत्ति
याचिका में यह भी कहा गया है कि नवा रायपुर में प्रस्तावित बड़े आयोजन को बिना उचित प्रक्रिया के रद्द कर दिया गया और आयोजन स्थल को बालोद स्थानांतरित कर दिया गया। बृजमोहन अग्रवाल का आरोप है कि स्थान परिवर्तन से पहले उन्हें न तो जानकारी दी गई और न ही उनकी सहमति ली गई, जबकि वे संगठन के अध्यक्ष हैं।
वित्तीय अनियमितता का जिक्र
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी याचिका में लगभग 10 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि इसी अनियमितता के चलते आयोजन को रद्द किया गया, लेकिन इस पूरे मामले में उन्हें अंधेरे में रखा गया। उन्होंने इस पर पारदर्शी जांच की मांग की है।
12 फरवरी को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय सीमा में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी। माना जा रहा है कि उस दिन कोर्ट सभी पक्षों के तर्क सुनकर आगे की दिशा तय करेगा। फिलहाल यह मामला स्काउट गाइड संगठन और राज्य की राजनीति दोनों में चर्चा का विषय बना हुआ है।




