राष्ट्रीय

मणिपुर हिंसा: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया

हिंसा से उपजा संकट

मणिपुर में जातीय हिंसा ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि हजारों लोगों के जीवन को अस्थिर कर दिया। विस्थापन, असुरक्षा और अनिश्चित भविष्य ने पीड़ितों की परेशानियां बढ़ा दीं।

समिति का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2023 में जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता में एक समिति गठित की, ताकि पीड़ितों की राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया पर निगरानी रखी जा सके।

अब तक का कार्य

समिति ने राहत शिविरों, मुआवजा वितरण और पुनर्वास योजनाओं की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट को 42 रिपोर्टें सौंपी हैं। ये रिपोर्टें प्रशासनिक प्रयासों की वास्तविक तस्वीर पेश करती हैं।

कार्यकाल में विस्तार

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने समिति का कार्यकाल 31 जुलाई तक बढ़ा दिया। अदालत का मानना है कि पीड़ितों से जुड़े मामलों में अभी और निगरानी की आवश्यकता है।

न्यायिक निगरानी का महत्व

समिति को सीधे सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट करने का अधिकार दिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पीड़ितों के हितों की अनदेखी न हो।

निष्कर्ष

जस्टिस गीता मित्तल समिति का कार्यकाल बढ़ाया जाना यह स्पष्ट करता है कि मणिपुर हिंसा के पीड़ितों को न्याय और सम्मानजनक जीवन दिलाने की प्रक्रिया अभी जारी है।

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