‘अर्जुन से प्रेरित है इस साल का बजट, MSME पर फोकस और सट्टेबाजी पर लगाम की तैयारी’, Budget में एक कमी भी है!

Budget 2026-2027: कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्णकालिक डायरेक्टर परितोष कश्यप ने जागरण बिजनेस को बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 भारत को स्थिर प्रगति के पथ पर अग्रसर करता है, जो अर्जुन की कहानी से प्रेरित है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह नौवां बजट भाषण उत्पादन क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर और MSME पर केंद्रित है। यह वित्तीय अनुशासन बनाए रखता है, राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करता है और पूंजीगत खर्च बढ़ाता है।
HighLights
- MSME सेक्टर के लिए ₹10,000 करोड़ का ग्रोथ फंड
- राजकोषीय घाटा नियंत्रित, पूंजीगत खर्च में महत्वपूर्ण वृद्धि
- बैंकिंग सुधारों और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के उपाय
शायद यह समय अर्जुन की कहानी याद करने का है। महान योद्धा एक दिन में महान नहीं बनते। अर्जुन ने सालों तक लगातार अभ्यास किया। उन्होंने ताकत, एकाग्रता और निशाने की सटीकता को इतना तराशा कि वही उनकी पहचान बन गई। केंद्रीय बजट 2026-27 (Budget 2026-27) भी इसी सोच पर काम करता है, जब दुनिया व्यापार और राजनीति के नए बदलावों से हिल रही है, तब भारत खुद को धीरे-धीरे लेकिन लगातार मजबूत बना रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) का यह लगातार नौवां बजट भाषण है, और यह देश को अनुशासित रास्ते पर रखता है। नीतियों का फोकस भारत की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर है। बड़े स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत एमएसएमई सेक्टर (MSME Sector) और आधुनिक बैंकिंग जरूरतों के अनुसार ढला वित्तीय सिस्टम। संदेश साफ है- तेजी दिखाने के बजाय स्थिर प्रगति। यह रास्ता है लगातार पूंजीगत खर्च, संतुलित वित्त और निरंतर सुधारों का।
बजट की बड़ी तस्वीर
भारत इस बजट में मजबूत आधार के साथ प्रवेश कर रहा है। सरकारी वित्त स्थिति नियंत्रण में है। ऋण-से-GDP अनुपात FY27 में 55.6% रहने का अनुमान, जो FY26 के 56.1% से बेहतर है। राजकोषीय घाटा FY27 में 4.3%, जो पिछले साल 4.4% था। इससे सरकार लक्षित निवेश कर सकती है, वो भी बिना वित्तीय संतुलन बिगाड़े। सरकार का कुल उधारी कार्यक्रम ₹17.2 लाख करोड़ है, जो बाजार अनुमान से थोड़ा ज्यादा है, लेकिन नेट उधारी ₹11.7 लाख करोड़ व्यापक वित्तीय संतुलन में संभालने योग्य मानी गई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की धुरी
सरकारी पूंजीगत खर्च FY27 में बढ़कर ₹12.2 लाख करोड़ हो जाएगा, जो FY26 में ₹11.2 लाख करोड़ था। यह दशक भर से चल रहे निवेश अभियान को आगे बढ़ाता है। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड (Infrastructure Risk Guarantee Fund) की घोषणा हुई है। यह निर्माण चरण में परियोजनाओं के लिए आंशिक क्रेडिट गारंटी देगा, क्योंकि इसी चरण में जोखिम सबसे ज्यादा होता है। इससे बैंकों और कर्जदाताओं का भरोसा बढ़ेगा।
MSME पर सबसे बड़ा दांव
रोजगार और खपत की उम्मीदें MSME सेक्टर से जुड़ी हैं, इसलिए यहां सबसे ठोस कदम उठाए गए हैं। 10,000 करोड़ रुपए का एसएमई ग्रोथ फंड (SME Growth Fund) भविष्य की बड़ी कंपनियों को इक्विटी सपोर्ट मिलेगा। साथ ही, 2000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फंड Self-Reliant India Fund में माइक्रो उद्यमों के लिए जोखिम पूंजी भी मिलेगी।
सरकार ने तय किया है कि सभी CPSE खरीद MSME से TReDS प्लेटफॉर्म के जरिए होगी, जिससे भुगतान में पारदर्शिता आएगी और फाइनेंसर्स को बकाया रकम की स्पष्ट जानकारी मिलेगी। CGTMSE के जरिए क्रेडिट गारंटी, GeM-TReDS डेटा लिंक, और TReDS बिलों को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटी में बदलने की सुविधा मिलेगी। ये सब मिलकर MSME के लिए स्थिर वर्किंग कैपिटल माहौल बनाएंगे।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में सुधार
विकसित भारत (Viksit Bharat) के लिए बैंकिंग पर एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी, जो बैंकिंग नियमों और निगरानी ढांचे की समीक्षा करेगी। लक्ष्य है- विकास, स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता सुरक्षा के बीच संतुलन। कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में भी सुधार, मार्केट-मेकिंग और टोटल रिटर्न स्वैप जैसे उपायों से लंबी अवधि की पूंजी के स्रोत बढ़ेंगे। पूंजी बाजार में सावधानी बरती गई है। फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर सिक्योरिटी टांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी (STT) बढ़ाने से खुदरा सट्टेबाजी कम हो सकती है और निवेश ज्यादा समझदारी वाला बन सकता है।
बजट में एक कमी भी है!
निजी क्षेत्र के पूंजीगत खर्च को सीधे बढ़ाने के लिए स्पष्ट प्रोत्साहन योजना की कमी दिखती है। सरकारी खर्च और MSME सुधार मदद करेंगे, लेकिन कॉरपोरेट कैपेक्स के लिए अलग प्रोत्साहन निवेश चक्र को और गति दे सकता था।
लॉजिस्टिक्स और डिजिटल ढांचा
- डेडिकेटेट माल ढुलाई वाले कॉरिडोर्स (Dedicated Freight Corridors)
- अगले 5 साल में 20 नए नेशनल वॉटरवेज (National Waterways)
- कोस्टल कार्गो प्रोमोशन स्कीम (Coastal Cargo Promotion Scheme)
इनका लक्ष्य है- माल ढुलाई को सड़क-रेल से हटाकर सस्ते और कुशल विकल्पों की ओर ले जाना। विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं को भारतीय डेटा सेंटर इस्तेमाल करने पर 2047 तक टैक्स हॉलिडे दिया गया है। इससे डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, यह बजट दिखावटी नहीं, बल्कि भरोसेमंद है। यह वित्तीय अनुशासन बनाए रखता है, बुनियादी ढांचा मजबूत करता है और MSME को मजबूत वित्तीय आधार देता है। भारत धीरे-धीरे क्षमता बना रहा है। अवसर बढ़ा रहा है और अगले दशक की आर्थिक रफ्तार के लिए इंजन तैयार कर रहा है।
(नोटः लेखक कोटक महिंद्रा बैंक के फुलटाइम डायरेक्टर हैं।)




