अंता उपचुनाव की हार से हिली बीजेपी, पत्रकांड ने खोली संगठन की दरारें

चुनाव नतीजों के बाद बदला माहौल
राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। यह हार सिर्फ चुनावी गणित तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके साथ ही पार्टी के भीतर लंबे समय से दबा असंतोष भी सामने आ गया। नतीजों के बाद जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए, उसने संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हार की समीक्षा से शुरू हुआ विवाद
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पार्टी नेतृत्व ने हार के कारणों की समीक्षा शुरू की। इसी दौरान बीजेपी प्रत्याशी रहे मोरपाल सुमन ने प्रदेश नेतृत्व को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने चुनावी हार के लिए पार्टी के ही कुछ नेताओं और पदाधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। यह पत्र अंदरूनी संवाद के लिए था, लेकिन इसके सार्वजनिक होते ही मामला तूल पकड़ गया।
वायरल पत्र और बढ़ता बवाल
मोरपाल सुमन का यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पत्र में भीतरघात, सहयोग न मिलने और चुनावी रणनीति को कमजोर करने जैसे आरोप लगाए गए थे। जैसे ही यह पत्र सामने आया, पार्टी के भीतर हड़कंप मच गया। विपक्ष को भी बीजेपी पर हमला करने का मौका मिल गया।
अनुशासन पर पार्टी का रुख
पत्र के वायरल होने को पार्टी नेतृत्व ने गंभीर अनुशासनहीनता माना। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मोरपाल सुमन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में जवाब मांगा। पार्टी का कहना था कि आंतरिक मामलों को सार्वजनिक करना संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाता है।
मोरपाल सुमन की सफाई
नोटिस के जवाब में मोरपाल सुमन ने पत्र लीक करने से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह पत्र मीडिया को उन्होंने नहीं दिया और एक स्थानीय विधायक द्वारा इसे सार्वजनिक किया गया। सुमन की इस सफाई के बाद विवाद और गहरा गया, क्योंकि अब सवाल यह बन गया कि पत्र आखिर बाहर कैसे पहुंचा।
जांच की शुरुआत
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने आंतरिक जांच के आदेश दिए। एक वरिष्ठ प्रदेश पदाधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच के तहत बारां जिले के बीजेपी विधायकों से पूछताछ की गई, लेकिन सभी ने पत्र लीक करने से इनकार कर दिया।
खुद मैदान में उतरे प्रदेश अध्यक्ष
अब प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ स्वयं पूरे मामले को समझने के लिए सक्रिय हो गए हैं। वे जल्द ही बारां जिले के बीजेपी विधायक प्रताप सिंह सिंघवी, ललित मीणा और राधेश्याम बैरवा से व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे। इसके अलावा उपचुनाव के प्रभारियों और जिला अध्यक्ष से भी बातचीत की जाएगी।
आरोपों का बढ़ता दायरा
मोरपाल सुमन के पत्र में सिर्फ स्थानीय नेताओं पर ही नहीं, बल्कि एक कैबिनेट मंत्री और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की टीम पर भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष आरोप लगाए गए हैं। इससे विवाद का स्तर और संवेदनशील हो गया है और पार्टी नेतृत्व के लिए स्थिति संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
पहले से मौजूद असंतोष
अंता उपचुनाव से पहले भी बारां जिले में असंतोष के संकेत मिल चुके थे। विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने भी प्रदेश नेतृत्व को पत्र लिखकर प्रचार से खुद को अलग-थलग किए जाने की शिकायत की थी। इससे साफ होता है कि संगठन के भीतर मतभेद पहले से ही मौजूद थे।
संगठन के लिए चुनौती
अंता उपचुनाव की हार बीजेपी के लिए चेतावनी बनकर सामने आई है। यह केवल एक सीट का नुकसान नहीं, बल्कि संगठनात्मक कमजोरी का संकेत भी है। अब देखना होगा कि जांच से पार्टी में संतुलन लौटता है या यह विवाद आगे और गहराता है।




