ईरान युद्ध के बीच तेल संकट, अमेरिका ने खोला रणनीतिक भंडार

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर कर रख दिया है। तेल की कीमतों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी के बीच अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने रणनीतिक भंडार को खोलने का फैसला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने घोषणा की है कि अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारेगा। इस कदम का मकसद बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करना और वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। अगर हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं।
मिडिल ईस्ट संघर्ष से बढ़ा ऊर्जा संकट
हाल के महीनों में Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया है। दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों ने तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को खतरे में डाल दिया है।
खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादन क्षेत्रों में से एक है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति को तुरंत प्रभावित करता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल देखने को मिला है।
विशेष रूप से खाड़ी का अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz चिंता का बड़ा कारण बन गया है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। अगर यह मार्ग बाधित होता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व क्या है
अमेरिका का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, जिसे Strategic Petroleum Reserve कहा जाता है, दुनिया के सबसे बड़े आपातकालीन तेल भंडारों में से एक है। इसे खास तौर पर संकट की स्थिति में उपयोग करने के लिए बनाया गया था।
इस भंडार में लाखों बैरल कच्चा तेल सुरक्षित रखा जाता है ताकि युद्ध, प्राकृतिक आपदा या किसी बड़े आपूर्ति संकट के समय बाजार में अतिरिक्त तेल उपलब्ध कराया जा सके।
अब अमेरिका ने इसी भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल निकालकर बाजार में उतारने का फैसला किया है।
चार महीने में बाजार में आएगा तेल
अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार यह तेल एक साथ बाजार में नहीं उतारा जाएगा। इसे धीरे-धीरे जारी किया जाएगा ताकि बाजार में संतुलन बना रहे।
योजना के मुताबिक यह प्रक्रिया अगले सप्ताह से शुरू होगी और करीब 120 दिनों तक जारी रहेगी। इस दौरान चरणबद्ध तरीके से तेल की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी।
सरकार को उम्मीद है कि इससे वैश्विक बाजार में कुछ स्थिरता आएगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
IEA ने भी किया रिकॉर्ड फैसला
सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सहयोग संगठन International Energy Agency ने भी बड़ा कदम उठाया है।
IEA के 32 सदस्य देशों ने मिलकर लगभग 400 मिलियन बैरल तेल अपने आपातकालीन भंडार से बाजार में उतारने की घोषणा की है। इसे अब तक का सबसे बड़ा समन्वित तेल रिलीज माना जा रहा है।
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक बाजार में तेल की कमी न हो और कीमतें नियंत्रण में रहें।
बाजार में फिर भी बनी हुई है चिंता
हालांकि इतनी बड़ी मात्रा में तेल जारी करने की घोषणा के बावजूद बाजार में पूरी तरह स्थिरता नहीं आई है। कई निवेशकों और व्यापारियों को अभी भी डर है कि मिडिल ईस्ट का संघर्ष लंबा चल सकता है।
इसी वजह से तेल की कीमतों में चार प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की बाधा आती है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अमेरिका में भी बढ़ रही पेट्रोल की कीमतें
ऊर्जा संकट का असर अमेरिका के घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर लगभग 3.58 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है।
लगातार कई दिनों से कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम लोगों और परिवहन क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
भविष्य में फिर भरा जाएगा भंडार
अमेरिकी ऊर्जा अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अस्थायी राहत के लिए उठाया गया है। जब बाजार की स्थिति सामान्य हो जाएगी तब सरकार रणनीतिक भंडार को फिर से भरने की योजना बनाएगी।
बताया गया है कि भविष्य में लगभग 200 मिलियन बैरल तेल खरीदकर भंडार को फिर मजबूत किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति तय करेगी कि वैश्विक तेल बाजार किस दिशा में जाएगा।




