छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश हो सकता है मतांतरण के विरुद्ध नया विधेयक, दूर हुई कानूनी बाधा

छत्तीसगढ़ में मतांतरण के विरुद्ध कठोर कानून बनाने की राह अब आसान हो गई है। राज्यपाल ने 2006 के विधेयक को विधानसभा को पुनर्विचार के लिए लौटा दिया है।
HighLights
- राज्यपाल ने 2006 के मतांतरण विधेयक को लौटाया।
- नया ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पेश होगा।
- जबरन मतांतरण की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
छतीसगढ़ में मतांतरण के विरुद्ध कठोर कानून बनाने की दिशा में तकनीकी बाधा दूर हो गई है। वर्ष 2006 में डॉ. रमन सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान पारित धर्म स्वातंर्त्य संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा वापस भेजे जाने के बाद अब राज्यपाल ने इसे पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटा दिया है।
इस संवैधानिक प्रक्रिया के साथ ही प्रदेश में नया और प्रभावी कानून लाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। विधेयक लौटाने की जानकारी स्पीकर ने सोमवार को सदन में दी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार इसी बजट सत्र में नया छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंर्त्य विधेयक, 2026 पेश करने की तैयारी में है। इस नए मसौदे को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। पुराने विधेयक के लंबित होने के कारण कानूनी तकनीकी फंसी थी, जो अब सुलझ गई है।
राज्य में मतांतरण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक वर्ष में कुल 96 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सर्वाधिक 32 मामले अकेले बिलासपुर जिले के हैं। नया कानून लागू होने से जबरन मतांतरण की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।




