कोरबा में दिव्य हनुमंत कथा का भव्य समापन, राज्यपाल रमेन डेका की मौजूदगी में 108 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह

कोरबा
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ढपढप-बांकीमोंगरा क्षेत्र में आयोजित दिव्य श्री हनुमंत कथा का समापन अभूतपूर्व श्रद्धा, आस्था और सामाजिक समरसता के साथ हुआ। कई दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन के अंतिम दिन लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में बदल दिया। कथा के समापन अवसर पर छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की सबसे खास बात 108 निःशक्त एवं आर्थिक रूप से कमजोर कन्याओं का सामूहिक विवाह रहा, जिसने इस आयोजन को केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया। विवाह समारोह पूरी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ, जिसमें वर-वधू पक्ष के साथ-साथ हजारों लोगों ने साक्षी बनकर नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया।
राज्यपाल रमेन डेका ने नवविवाहित जोड़ों से मुलाकात की और उनके सुखद, समृद्ध एवं सफल वैवाहिक जीवन की कामना की। उन्होंने इस अवसर पर प्रत्येक जोड़े को 5,000 रुपये की सम्मान राशि प्रदान करने की घोषणा की। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि इस तरह के सामूहिक विवाह कार्यक्रम समाज में समानता, सहयोग और सेवा की भावना को मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी मौजूद रहे, जिनके प्रवचनों ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कोरबा को ‘ऊर्जा नगरी’ बताते हुए कहा कि यह शहर न केवल देश को बिजली प्रदान करता है, बल्कि अब आध्यात्मिक ऊर्जा का भी केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यह भी कहा कि समाज सेवा के ऐसे कार्य, जैसे निर्धन कन्याओं का विवाह, वास्तव में पुण्य के कार्य हैं और इनसे समाज में सकारात्मक बदलाव आता है। उन्होंने आयोजन समिति ‘अपना घर सेवा परिवार’ की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में प्रदेश के कई प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें कलेक्टर कुणाल दुदावत समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। सभी ने आयोजन की भव्यता और सामाजिक उपयोगिता की सराहना की। आयोजन स्थल पर सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया गया, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
कथा स्थल पर दूर-दराज के जिलों और राज्यों से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और कथा प्रवचनों के चलते पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था। श्रद्धालु देर रात तक कथा श्रवण और भक्ति में लीन रहे।
इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि धार्मिक कार्यक्रम केवल आस्था तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज में सेवा, सहयोग और एकता का संदेश भी देते हैं। 108 कन्याओं का सामूहिक विवाह इस बात का जीवंत उदाहरण बना, जहां समाज के विभिन्न वर्गों ने मिलकर एक सकारात्मक पहल को सफल बनाया।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों को जारी रखने का संकल्प लिया। इस भव्य आयोजन ने कोरबा को न केवल धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान दी, बल्कि सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।




