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Apache Helicopters:रॉकेट, मिसाइल और 1200 राउंड फायरिंग क्षमता वाली गन से लैस… भारत को जल्द मिलने जा रहा है एक घातक अटैक हेलिकॉप्टर।

 अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टर एक समय में युद्ध क्षेत्र में अपने दमदार प्रदर्शन के लिए जाना जाता था. इसने अफगानिस्तान, इराक और लीबिया जैसे देशों में युद्ध के दौरान अपनी घातक क्षमताओं से प्रभावित किया था. इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें, आधुनिक सेंसर, रडार और उच्च गतिशीलता जैसे फीचर हैं. भारत ने अमेरिका से छह अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर की डील की है, जिनमें से तीन इसी महीने (जुलाई में) मिलने वाले हैं.

भारत ने साल 2020 में अमेरिका के साथ 600 मिलियन डॉलर की डील के तहत छह AH-64E हेलीकॉप्टर खरीदने का फैसला किया. ये हेलीकॉप्टर मार्च 2024 से जोधपुर में तैनात किए जाने थे, लेकिन इनकी डिलीवरी में देरी हुई. मिली जानकारी के अनुसार, इनमें से तीन अटैक हेलीकॉप्टर इसी महीने और बाकी नवंबर 2025 में डिलीवर होने की संभावना है.

क्या है अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर की खासियत? 

अपाचे 64 एक ट्विन-टर्बोशाफ्ट, चार-ब्लेड वाला हेलीकॉप्टर है जिसके आगे सेंसर लगा हुआ है, जो टारगेट पर हमला आसान बनाता है. हेलीकॉप्टर के लेजर, इंफ्रारेड और अन्य सिस्टम द्वारा टारगेट की जगह, ट्रैकिंग और हमला संभव बनाया गया है. इसमें 70 मिमी रॉकेट, लेजर-गाइडेड प्रिसिज़न हेलफ़ायर मिसाइल और 30 मिमी की स्वचालित तोप भी है जो उच्च-विस्फोटक, दोहरे उद्देश्य वाले गोला-बारूद के 1,200 राउंड तक फायर कर सकती है.

डील पर फिर विचार कर रहा है साउथ कोरिया

अमेरिका के खास सहयोगी साउथ कोरिया ने 36 अपाचे हेलीकॉप्टर के लिए डील की थी, लेकिन अब वो इस पर फिर से विचार कर रहा है. दरअसल 2023 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय ने अपाचे हेलीकॉप्टरों की आधुनिक युद्ध में इस्तेमाल न किए जाने की बात को स्वीकार किया रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सेना के अंदर यह विचार बन चुका है कि शायद उन्हें सभी 36 यूनिट की जरूरत नहीं है. यूक्रेन-रूस युद्ध से भी यह बात स्पष्ट हुई है कि बड़े आकार के हेलीकॉप्टर, विशेषकर फिक्स्ड टारगेट बनकर, ड्रोन हमलों के लिए आसान शिकार बनते हैं.

ड्रोन की ओर साउथ कोरिया का झुकाव ज्यादा

दुनिया की प्रमुख सेनाएं, जैसे अमेरिका, इजरायल, चीन और अब दक्षिण कोरिया  तेजी से Unmanned Aerial Systems (UAS) या ड्रोन आधारित युद्ध क्षमताओं की ओर रुख कर रही हैं. इसकी मदद से ऑपरेशन को बिना किसी जोखिम के पूरा किया जा सकता है. इसकी लागत कम लगती है. लंबी रेंज से निगरानी और हमला करना आसान होता है. वहीं, अपाचे जैसे मानवयुक्त हेलीकॉप्टरों की लागत ज्यादा है, ट्रेनिंग में लंबा समय लगता है और उनकी रिकवरी की लागत भी अधिक है.

भारत का झुकाव अभी भी अपाचे हेलीकॉप्टर की ओर

भारत की वर्तमान रक्षा नीति अब भी पारंपरिक प्लेटफार्मों में भारी निवेश पर केंद्रित है. अपाचे AH-64E का ऑर्डर इसी रणनीति का उदाहरण है. हालांकि ये हेलीकॉप्टर सीमित क्षेत्रीय संघर्षों में असरदार हो सकते हैं. दरअसल भारत की सीमाएं पाकिस्तान और चीन से लगती हैं, जिनसे लड़ाई में अपाचे हेलीकॉप्टर की महती भूमिका होगी.

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