
सहारनपुर की शांत गलियों में शनिवार की शाम अचानक हलचल मच गई। अंबाला रोड का वह निजी अस्पताल, जहाँ रोज़ मरीज़ों की भीड़ उमड़ती थी, अब पुलिस के सायरनों की आवाज़ से गूंज रहा था।
लोगों के चेहरे पर सवाल थे — “क्यों आई श्रीनगर पुलिस यहाँ?”
धीरे-धीरे खबर फैली — “डॉक्टर आदिल को ले गए हैं।”
वह डॉक्टर, जो महीनों से यहाँ सेवा दे रहा था, जिसने अभी कुछ ही दिन पहले एक साथी डॉक्टर से निकाह किया था, अब एक नए और भयावह आरोप के घेरे में था — जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाने का।
कश्मीर की वादियों में शुरू हुई यह कहानी, सहारनपुर की सड़कों तक पहुँच गई थी। श्रीनगर पुलिस ने CCTV में एक चेहरा देखा था — रात की दीवारों पर चिपकते कागज़, जिन पर आतंक के प्रतीक शब्द लिखे थे। वही चेहरा अब अस्पताल की गलियों में गिरफ्तार हो चुका था।
लोग कहते हैं, “वह तो सीधा-सादा था, शांत स्वभाव का।”
लेकिन सच्चाई कभी-कभी सबसे साधारण चेहरों के पीछे छिपी होती है।
रात के अंधेरे में जब पुलिस की गाड़ियाँ निकलीं, शहर की नींद उचट गई। पुलिस चौकियों पर चौकसी बढ़ा दी गई, अस्पतालों में नाम-पते जाँचे जाने लगे।
सवालों की फुसफुसाहट हर ओर थी —
क्या वह अकेला था?
क्या किसी और के इशारे पर यह सब हुआ?
सहारनपुर की वह रात शहर की यादों में दर्ज हो गई — जब एक डॉक्टर, जो जीवन बचाने की शपथ ले चुका था, खुद शक के घेरे में आ गया।




