
अमिलिहा का हादसा दर्दनाक जरूर है, लेकिन यह हम सबके लिए एक संदेश भी छोड़ गया है।
एक युवक की जान चली गई, एक मां अस्पताल में है, एक मित्र जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है — और हम सोचते हैं, “काश ज़रा धीमे चलते…”
सड़क सुरक्षा कोई सरकारी नियम नहीं, बल्कि जीवन बचाने का संस्कार है।
अगर हर चालक थोड़ा सावधान हो, हर परिवार अपने बच्चों को हेलमेट और सीट बेल्ट की अहमियत सिखाए, तो ऐसे हादसे घट सकते हैं।
आशीष नहीं लौटेगा, पर उसकी कहानी हमें यह सिखा सकती है कि रफ्तार कभी ज़िंदगी से बड़ी नहीं होती।
आइए, आज हम संकल्प लें —
हम सड़क पर नियमों का पालन करेंगे,
हम किसी की जान खतरे में नहीं डालेंगे,
क्योंकि हर घर में कोई “आशीष” है, जिसकी किसी को ज़रूरत है।




