
मुख्य रिपोर्ट:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों का मतदान सोमवार को सम्पन्न हो गया। राज्य के मतदाताओं ने इस बार रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी करते हुए 67.2 प्रतिशत मतदान किया, जो पिछले दो चुनावों की तुलना में कहीं अधिक है। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की उपस्थिति ने इस बार नया इतिहास रचा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परिणाम न केवल मतदान के आँकड़ों में बल्कि राजनीति के चरित्र में भी बदलाव का संकेत देता है।
राज्य भर में शांति पूर्ण मतदान संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग ने अभूतपूर्व तैयारी की थी। 80,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए। दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधा, महिलाओं के लिए “सखी बूथ” और तकनीक आधारित कतार प्रबंधन प्रणाली लागू की गई। आयोग के अनुसार, इस बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) के उपयोग में भी अधिक पारदर्शिता रही।
चुनावी मुद्दों की बात करें तो मतदाता इस बार जातीय समीकरणों से आगे बढ़कर विकास, रोजगार और कानून व्यवस्था पर अधिक केंद्रित रहे। युवाओं और प्रथम बार वोट डालने वालों में राजनीतिक जागरूकता स्पष्ट रूप से देखी गई।
नालंदा की वोटर पूजा कुमारी ने कहा, “हमने जात-पात नहीं, काम देखा है। सड़क, शिक्षा और रोजगार अब असली मुद्दे हैं।”
राजनीतिक दलों ने भी इस बार अपने घोषणापत्र में रोजगार, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया। प्रमुख गठबंधन और विपक्षी दल दोनों ने ‘युवा बिहार, विकसित बिहार’ का नारा दिया। हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान आरोप-प्रत्यारोप और रैलियों की गहमागहमी ने चुनावी माहौल को गर्म बनाए रखा।
मतदान के बाद आए शुरुआती रुझानों से यह स्पष्ट हो रहा है कि जनता इस बार “काम करने वाली सरकार” को प्राथमिकता दे रही है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि मानसिकता परिवर्तन का संकेत है।
राजनीति विशेषज्ञ डॉ. आलोक सिंह के अनुसार, “बिहार के मतदाताओं ने इस बार यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वे ठोस नतीजे चाहते हैं, न कि भाषण।”
अंतिम नतीजे भले ही घोषित न हुए हों, पर इतना तय है कि 2025 का यह चुनाव बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत करेगा — जहाँ जनभावनाएँ और विकास एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।




