फतेहपुर की धरती पर गिरी गाज ने खनन और परिवहन की काली दुनिया को उजागर कर दिया — जहाँ एसटीएफ ने वसूली के जाल को चीरकर सच्चाई सामने रख दी।

भ्रष्टाचार पर एसटीएफ की सर्जिकल स्ट्राइक: ईमानदारी की जीत की एक मिसाल
फतेहपुर की धरती आज एक नई उम्मीद की गवाही दे रही है। वर्षों से जिस अवैध वसूली के जाल में मोरंग ट्रक चालक फंसे थे, उस पर आखिरकार न्याय की किरण चमकी है। एसटीएफ की टीम ने साहसिक कदम उठाते हुए खनन अधिकारी समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर भ्रष्टाचार के खिलाफ सशक्त संदेश दिया है।
यह मामला सिर्फ एक विभागीय कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। जब सरकारी मशीनरी का कोई हिस्सा गलत रास्ते पर चलता है, तब ऐसी निर्णायक कार्रवाइयाँ ही समाज में भरोसा जगाती हैं कि “सत्य को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं।”
एसटीएफ निरीक्षक दीपक सिंह और उनकी टीम ने यह साबित किया कि सच्ची निष्ठा और ईमानदारी से किया गया काम व्यवस्था को बदल सकता है। जांच में सामने आया कि बांदा से आने वाले ट्रकों से प्रति ट्रक वसूली की जाती थी, और यह पैसा कई विभागीय चैनलों में बांटा जाता था। इसके बावजूद टीम ने दबावों की परवाह किए बिना निष्पक्ष कार्रवाई की।
ऐसी घटनाएँ हमें यह सिखाती हैं कि भ्रष्टाचार कितना भी गहरा क्यों न हो, यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो जाल टूट सकता है। समाज को भी यह समझने की आवश्यकता है कि गलत को सहना भी एक अपराध है। यदि ट्रक ऑपरेटर, व्यापारी और आम नागरिक मिलकर सच के साथ खड़े हों, तो किसी भी अवैध नेटवर्क की नींव नहीं टिक सकती।
एसटीएफ की यह कार्रवाई प्रशासनिक जगत में एक चेतावनी है — कि कानून से ऊपर कोई नहीं। आज यह घटना फतेहपुर की है, कल किसी और जिले की हो सकती है, पर इसका असर पूरे प्रदेश में महसूस किया जा रहा है।
यही वह क्षण हैं जब हम यह कह सकते हैं — ईमानदारी अभी जीवित है। बस हमें उसे पहचानना और समर्थन देना है।




