पंक्चर वाले के QR कोड से घूस ले रहा था ट्रैफिक कांस्टेबल, जयपुर में भ्रष्टाचार का अनोखा खुलासा।

जयपुर में भ्रष्टाचार का एक अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसने न केवल पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए बल्कि यह भी बताया कि तकनीक का उपयोग गलत तरीके से कैसे किया जा सकता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में यातायात पुलिस का एक कॉन्स्टेबल वाहनों के चालान नहीं काटने के बदले रिश्वत ले रहा था। लेकिन खास बात यह थी कि वह रिश्वत की राशि खुद नहीं लेता था, बल्कि उसे एक पंक्चर बनाने वाले के क्यूआर कोड से ऑनलाइन भुगतान करवाता था। इस हाईटेक तरीके से चल रहे घोटाले का जब राजफाश हुआ, तो पुलिस भी हैरान रह गई।
इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब बजाज नगर पुलिस थाना अधिकारी पूनम चौधरी को मुखबिर से सूचना मिली कि कॉन्स्टेबल भवानी सिंह यातायात नियम तोड़ने वालों से अवैध वसूली कर रहा है और पैसे किसी बाहरी व्यक्ति के माध्यम से लेता है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जाल बिछाया और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया। जांच में पता चला कि भवानी सिंह पंक्चर बनाने वाले मोहम्मद मुस्ताक के साथ मिलकर यह अवैध कमाई कर रहा था। वह चालान काटने की धमकी देकर लोगों को अपने जाल में फंसा देता था और फिर उनसे कहता कि अगर चालान से बचना है, तो जुर्माने की राशि ऑनलाइन मुस्ताक के क्यूआर कोड पर भेजनी होगी।
इस तरह कॉन्स्टेबल ने रिश्वत लेने का एक नया तरीका इजाद किया, जिससे वह खुद सीधे पैसे लेने से बच जाता और किसी बाहरी व्यक्ति के खाते के जरिए रकम ट्रांसफर करवाकर मामले को कानूनी पकड़ से दूर रखने की कोशिश करता। लेकिन भ्रष्टाचार के इस तंत्र की पोल आखिरकार खुल ही गई। पुलिस ने न केवल कॉन्स्टेबल को बल्कि पंक्चर बनाने वाले मोहम्मद मुस्ताक को भी गिरफ्तार किया। शनिवार को दोनों को जयपुर जिला न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कॉन्स्टेबल भवानी सिंह काफी समय से इस काम में सक्रिय था। वह सड़क पर वाहन मालिकों को रोकता, चालान की बात करके उन्हें डराता और फिर पैसे ऑनलाइन दिलवाकर छोड़ देता। यह कभी-कभी नकद रुपयों में भी होता था, लेकिन ऑनलाइन भुगतान के लिए उसने पंक्चर वाले के क्यूआर कोड को एक सुरक्षित माध्यम बना रखा था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल है तथा यह अवैध कमाई कितने समय से चल रही थी।
इस घटना ने आम जनता में नाराजगी बढ़ा दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर कानून की रक्षा करने वाले ही इस तरह कानून तोड़ते पकड़े जाएंगे, तो फिर आम नागरिक किससे न्याय की उम्मीद करें? यह मामला तकनीक के दुरुपयोग और पुलिस तंत्र में फैले भ्रष्टाचार की ओर एक गंभीर संकेत है।
पुलिस विभाग ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम की निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि इस तरह की गलत गतिविधियों को रोका जा सके।
यह मामला भ्रष्टाचार के उस नए रूप को सामने लाता है, जिसमें अब रिश्वत लेने के लिए नकद के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। तकनीक का जहां एक ओर समाज को पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने में उपयोग होना चाहिए, वहीं दूसरी ओर इसी तकनीक के जरिये भ्रष्टाचार के नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि कानून कितना भी मजबूत क्यों न हो, लेकिन अगर उसके रखवाले ही गलत रास्ते पर चल पड़ें, तो न्याय और व्यवस्था दोनों खतरे में पड़ जाते हैं। जयपुर पुलिस अब इस मामले की गंभीर जांच कर रही है, और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले की पूरी सच्चाई सबके सामने आएगी।




