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मतांतरण के आरोपों के बीच कोरबा की चंगाई सभा विवाद का केंद्र बन गई।
आस्था बनाम कानून
धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा
भारत में हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता कानून के दायरे में ही है। कोरबा की चंगाई सभा इसी संतुलन की परीक्षा बन गई।
नियमों की अनदेखी
बिना अनुमति सभा आयोजित करना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। प्रशासनिक नियमों का उद्देश्य ही शांति व्यवस्था बनाए रखना होता है।
विरोध का स्वर
हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताया और सख्त कदम उठाने की मांग की। उनका कहना था कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।
मसीही समाज की दलील
मसीही समाज ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया। उनका कहना था कि हर धर्म को अपने कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार है।
पुलिस की जिम्मेदारी
पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने और स्थिति को शांत करने की कोशिश की। केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।
बड़ा सवाल
यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि धार्मिक आयोजनों और कानून के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।



