राष्ट्रीय

‘केवल कुछ लोगों को निशाना बनाकर दायर याचिकाएं स्वीकार्य नहीं’, हेट स्पीच मामले में सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों को कथित तौर पर प्रभावित करने वाले भाषणों एवं रिपोर्टिंग के संदर्भ में नेताओं एवं मीडिया के लिए दिशानिर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनेताओं को देश में बढ़ाना चाहिए भाईचारा
  2. नफरती भाषणों के संदर्भ में नेताओं व मीडिया के लिए दिशा-निर्देशों की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार
  3. कहा- यह याचिका एक व्यक्ति के विरुद्ध है इसे वापस लें, इस संबंध में एक साधारण याचिका दायर करें

 सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा की कि राजनेताओं को देश में भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा सहित 12 याचिकाकर्ताओं को राजनीतिक भाषणों पर दिशा-निर्देशों को लेकर एक नई याचिका दायर करने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों को कथित तौर पर प्रभावित करने वाले भाषणों एवं रिपोर्टिंग के संदर्भ में नेताओं एवं मीडिया के लिए दिशानिर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था।

याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के कथित नफरत भरे भाषणों की पृष्ठभूमि में दायर की गई थी, जिस पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जिरह की।

प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री के विरुद्ध कार्रवाई का आग्रह करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। इन याचिकाओं में एक वायरल वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री की आलोचना की गई थी, जिसमें वह कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की ओर राइफल से निशाना साधते और गोली चलाते दिखे थे।

सिब्बल ने मंगलवार को सुनवाई के प्रारंभ में ही कहा कि माहौल विषाक्त हो रहा है। उन्होंने पीठ से आग्रह किया कि वह ऐसे दिशानिर्देश तैयार करे जिससे यह सुनिश्चित हो कि जब राजनीतिक भाषण से भाईचारा प्रभावित हो तो जवाबदेही तय की जा सके। हालांकि, पीठ इस बात से सहमत नहीं थी।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि याचिका में एक विशेष राजनीतिक दल के चुनिंदा व्यक्तियों को निशाना बनाया गया प्रतीत होता है। कहा, ‘निश्चित रूप से यह एक व्यक्ति के विरुद्ध है। इस समय, इसे वापस लें। इस संबंध में एक साधारण याचिका दायर करें कि किन शर्तों पर सुरक्षा उपाय निर्धारित किए गए हैं और राजनीतिक दल उनका कैसे उल्लंघन कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि कुछ चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने वाली याचिका स्वीकार्य नहीं होगी और ऐसी कोई भी चुनौती वस्तुनिष्ठ एवं निष्पक्ष होनी चाहिए। हम ऐसी याचिका पर विचार करने के इच्छुक हैं। हम किसी ऐसे व्यक्ति का इंतजार कर रहे हैं, जो आकर निष्पक्षता से ऐसी याचिका दायर करे।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाना चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों के संयम बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया और सवाल किया कि मान लीजिए हम कुछ दिशानिर्देश तय कर देंज् तो उनका पालन कौन करेगा? वाणी की उत्पत्ति विचार से होती है। विचारों को कैसे नियंत्रित किया जाए? हमें विचारों को संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप ढालना चाहिए।

सिब्बल ने कहा कि हालांकि, आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) चुनावों के दौरान लागू रहती है, लेकिन इसके लागू होने के बाद भी पूर्व में दिए भाषण इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होते रहते हैं। जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत केवल आदेश पारित कर सकती है, जबकि उनका कार्यान्वयन एक चुनौती बना रहता है।

पूर्व के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही घृणास्पद भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी से संबंधित कई सिद्धांत प्रतिपादित किए हैं। जिम्मेदारी राजनीतिक दलों की भी है। वह पार्टी के सदस्य हैं, एक नेता हैं।

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