बजट की तारीख तय, 1 फरवरी को ही होगा केंद्रीय बजट का प्रस्तुतीकरण।

1 फरवरी को ही पेश होगा केंद्रीय बजट, रविवार होने के बावजूद तारीख में बदलाव के संकेत नहीं
केंद्र सरकार आगामी केंद्रीय बजट को 1 फरवरी को ही पेश करने की तैयारी में है। खास बात यह है कि इस बार 1 फरवरी रविवार को पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद बजट की तारीख बदलने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार वित्तीय प्रक्रियाओं में निरंतरता और पूर्वानुमेयता बनाए रखने के उद्देश्य से इसी तारीख को बरकरार रखने के पक्ष में है। राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) ने बजट सत्र की संभावित तारीखों पर विचार किया है और अंतिम निर्णय जल्द सामने आ सकता है।
28 जनवरी से शुरू हो सकता है संसद का बजट सत्र
सूत्रों की मानें तो संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होने की संभावना है। सीसीपीए ने बजट सत्र की शुरुआत के लिए 28 जनवरी और 31 जनवरी जैसी तारीखों पर विचार किया है। हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन 28 जनवरी को सत्र प्रारंभ होने की संभावना अधिक मानी जा रही है। यह सत्र कैलेंडर वर्ष का पहला संसदीय सत्र होगा, जो हमेशा की तरह महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय एजेंडे के साथ आयोजित किया जाएगा।
राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी सत्र की औपचारिक शुरुआत
परंपरा के अनुसार बजट सत्र की शुरुआत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी। राष्ट्रपति का यह अभिभाषण सरकार की नीतियों, प्राथमिकताओं और आगामी वर्ष की कार्ययोजना का खाका प्रस्तुत करता है। इसके बाद संसद में अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होती है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी राय रखते हैं। यह प्रक्रिया बजट सत्र की दिशा और माहौल तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
आर्थिक सर्वेक्षण के बाद पेश किया जाएगा केंद्रीय बजट
राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद सरकार आर्थिक सर्वेक्षण पेश करती है, जिसमें देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण होता है। आर्थिक सर्वेक्षण को बजट का आधार माना जाता है, क्योंकि इसके निष्कर्षों के अनुरूप ही बजट में नीतिगत फैसले और घोषणाएं की जाती हैं। इसके बाद 1 फरवरी को वित्त मंत्री लोकसभा में केंद्रीय बजट पेश करेंगी।
2017 से 1 फरवरी को पेश हो रहा है बजट
गौरतलब है कि वर्ष 2017 से ही केंद्र सरकार 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश कर रही है। इससे पहले बजट फरवरी के अंतिम कार्यदिवस पर प्रस्तुत किया जाता था। तारीख में बदलाव का उद्देश्य यह था कि बजट को 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष से पहले ही लागू किया जा सके। इससे मंत्रालयों और विभागों को योजनाओं के क्रियान्वयन में समय मिलता है और राजकोषीय प्रशासन अधिक प्रभावी बनता है।
दो चरणों में आयोजित होता है बजट सत्र
बजट सत्र आमतौर पर दो चरणों में आयोजित किया जाता है। पहले चरण में बजट प्रस्तुति, आर्थिक सर्वेक्षण और सामान्य चर्चा होती है। इसके बाद कुछ समय का विराम दिया जाता है, ताकि संसद की स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों की समीक्षा कर सकें। दूसरे चरण में अनुदान मांगों, विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक पर विस्तार से चर्चा और पारित करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इस सत्र में कई अहम विधेयकों के पेश होने और चर्चा की भी संभावना है।
फरवरी में भारत करेगा एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी
बजट सत्र के दौरान ही भारत फरवरी महीने में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी भी करेगा। यह वैश्विक सम्मेलन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी प्रभावों पर केंद्रित होगा। ऐसे में सरकार के लिए यह महीना न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि तकनीकी और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार बजट सत्र और बजट प्रस्तुति को लेकर तय समय-सारिणी पर आगे बढ़ती नजर आ रही है। 1 फरवरी रविवार होने के बावजूद बजट पेश करने का प्रस्ताव यह संकेत देता है कि सरकार वित्तीय सुधारों और समयबद्ध प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दे रही है। अब सबकी निगाहें सीसीपीए के अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे बजट सत्र की तारीखों पर अंतिम मुहर लगेगी।




