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Gold ETF Magic:10 हजार की SIP से 5 साल में मिले 10 लाख! अब 2026 में कितना महंगा होगा सोना?-केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से 2026 तक 15% रिटर्न की उम्मीद।

वैश्विक उथल-पुथल के बीच गोल्ड ईटीएफ निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन गए हैं। पिछले एक साल में इन्होंने 76-79% तक का रिटर्न दिया है, जो बैंक एफडी से कहीं अधिक है। ₹10,000 की मासिक एसआईपी से पांच साल में ₹10 लाख मिले। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और डॉलर पर घटते भरोसे के कारण सोने की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद है, 2026 तक 15% से अधिक रिटर्न संभव है।

 वैश्विक उथल-पुथल के बीच गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) सिर्फ भारत ही नहीं दुनियाभर में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जानकारों का कहना है कि गोल्ड ईटीएफ तेजी से निवेशकों की पहली पसंद बनते जा रहे और इसकी सबसे बड़ी वजह इससे मिलने वाला रिटर्न है। पिछले एक साल में घरेलू बाजार में विभिन्न गोल्ड ईटीएफ ने 76-79 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।

इतना रिटर्न किसी बाजार, किसी बैंक या किसी अन्य निवेश ने नहीं दिया है। बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट पर अभी अधिकतम 7.5 प्रतिशत तक का रिटर्न मिल रहा है। व‌र्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक वर्ष 2025 में गोल्ड ईटीएफ में वैश्विर स्तर पर 77 अरब डॉलर का निवेश किया गया। तभी पिछले एक साल में म्यूचुअल फंड से जुड़ी कई कंपनियों ने अपना गोल्ड ईटीएफ लांच किया है।पिछले पांच साल के रिटर्न का औसत देखें तो भी गोल्ड ईटीएफ सबसे आगे दिखता है।

वर्ष 2020 के मध्य में अगर किसी निवेशक ने सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआइपी) में 10,000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से निवेश किया तो पांच साल में उसे 10 लाख रुपए मिले। यानी कि उसने पांच साल में निवेश किए छह लाख रुपये और पांच साल में 21 प्रतिशत रिटर्न के साथ उसे 10 लाख रुपये मिले। जानकारों का कहना है कि दुनियाभर के केंद्रीय बैंक की तरफ से सोने की खरीदारी में तेजी से भी इसके दाम में तेजी को समर्थन मिल रहा है।

पिछले सालों में विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों ने 1100 टन से अधिक सोने की खरीदारी की। व‌र्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि वर्ष 2026 में सोना 15 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दे सकता है। अभी 24 कैरेट सोने का भाव सराफा बाजार में 1,45,445 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा है। गत 31 दिसंबर को यह कीमत 1.36 लाख तो पिछले साल 15 जनवरी को 81,000 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।

वर्तमान हालात को देखते हुए सोने को ऊपर जाने से रोका नहीं जा सकता है। गोल्ड ईटीएफ की वजह से अब सोने को न तो खरीदना मुश्किल है और न बेचना। पहले यह सुविधा नहीं थी। डॉलर में लोगों का भरोसा कम होने के साथ दुनियाभर में चल रहे उथल-पुथल से सोने में बढ़त बनी रहेगी।’-एसपी शर्मा, मुख्य अर्थशास्त्री, नियो इकोनामिस्ट्स

2003 में गोल्ड ईटीएफ की हुई शुरुआतगोल्ड ईटीएफ सीधे तौर पर सोने की कीमत से जुड़ा है और इसे शेयर की तरह डिजिटल तौर पर खरीदा जा सकता है। ईटीएफ प्लेटफार्म पर अमूमन इसकी बिक्री प्रति ग्राम के रूप में होती है और एसबीआइ से लेकर कई बैंक व निजी इंवस्टेर्स कंपनियां इसकी बिक्री करते हैं। वर्ष 2003 में गोल्ड ईटीएफ की शुरुआत हुई और उसके बाद सोने की खरीदारी के प्रति लोगों का नजरिया बदल गया।

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