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समान पद और समान अनुभव होने के बावजूद कम वेतन दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने समान पद और समान अनुभव के बावजूद कम वेतन दिए जाने के मामले में सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

समान पद और समान अनुभव होने के बावजूद कम वेतन दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि विभाग का नाम बदलने के बाद भी कर्मचारियों को पुराने तरीके से कम वेतन दिया जा रहा है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल घगट की डबल बेंच ने की।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता रविंद्र कुशवाह और उनके साथ 28 अन्य कर्मचारियों ने यह याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया है कि वे प्रदेश के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में डिप्टी रजिस्ट्रार, हॉस्पिटल मैनेजर, असिस्टेंट हॉस्पिटल मैनेजर और बायोमेडिकल इंजीनियर के पदों पर काम कर रहे हैं। पहले ये सभी लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कार्यरत थे। सरकार ने साल 2024 में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग का विलय कर दिया था। इसके बाद नए विभाग का नाम लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग रखा गया। इसके बावजूद दोनों पुराने विभागों से आए कर्मचारियों का वेतनमान अब भी अलग-अलग रखा गया है।

पहले भी की गई थी शिकायत

याचिका में कहा गया है कि दूसरे विभाग के कर्मचारियों के बराबर योग्यता, अनुभव और जिम्मेदारी होने के बावजूद इन्हें कम वेतन दिया जा रहा है। इस वेतन विसंगति को दूर करने के लिए चिकित्सा शिक्षा निदेशक को पहले भी पत्र लिखा गया था। गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल, एसएस मेडिकल कॉलेज रीवा और बिरसा मुंडा सरकारी मेडिकल कॉलेज शहडोल के डीन ने भी मौजूदा पदों के वेतनमान में बदलाव का अनुरोध किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से यह याचिका दाखिल की गई है।

किन-किन को बनाया गया है पक्षकार

इस याचिका में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त और निदेशक के साथ-साथ प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन को पक्षकार बनाया गया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सुनवाई के बाद सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील आदित्य संघी ने पैरवी की।

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