मध्यप्रदेश

MP में भाजपा का ‘समर्पण निधि’ अभियान सुस्त : एक माह में जुटे सिर्फ 10 करोड़, लक्ष्य से काफी पीछे संगठन

नेताओं की अरुचि और डिजिटल भुगतान की अनिवार्यता के कारण एक महीने में केवल 10 करोड़ रुपये ही जमा हो पाए हैं, जबकि लक्ष्य 50 करोड़ से अधिक का था। पारदर्शिता के लिए 20 हजार से अधिक के दान पर पैन नंबर भी अनिवार्य किया गया है।

HighLights

  1. अभियान में एक माह में केवल 10 करोड़ रुपये एकत्र हुए।
  2. डिजिटल भुगतान की अनिवार्यता ने नेताओं की अरुचि बढ़ाई।
  3. पार्टी का लक्ष्य 50 करोड़ रुपये से अधिक जुटाना था।

मध्य प्रदेश में दो दशक से सत्तारूढ़ भाजपा के नेता संगठन को आर्थिक सहयोग करने में अरुचि दिखा रहे हैं। इस वजह से भाजपा का आजीवन सहयोग निधि यानी समर्पण निधि अभियान इस वर्ष लड़खड़ा गया है। इसका एक बड़ा कारण पूरी तरह डिजिटल या ऑनलाइन भुगतान अनिवार्य करना भी बताया जा रहा है।

अवधि बढ़ाई, फिर भी अपेक्षित सहयोग नहीं

जनसंघ के समय से चले आ रहे इस अभियान की शुरुआत प्रदेश में पार्टी के पितृ पुरुष स्व. कुशाभाऊ ठाकरे ने की थी। इसे प्रतिवर्ष पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि (11 फरवरी) के अवसर पर शुरू किया जाता है। एक महीने के बाद भी इस अभियान में मात्र 10 करोड़ की राशि एकत्र हो पाई है। पार्टी ने कोई लक्ष्य तो निर्धारित नहीं किया था, लेकिन संगठन को इस वर्ष 50 करोड़ रुपये से अधिक एकत्र होने की आशा थी। 28 फरवरी को समाप्त होने वाले इस अभियान को पार्टी ने 15 मार्च तक आगे भी बढ़ाया है। बता दें, पहले विधायक और सांसद स्वेच्छा से एक माह का वेतन समर्पण निधि में दिया करते थे। वर्ष 2025 में इसमें 25 करोड़ रुपये एकत्र हुए थे।

इस साल प्रक्रिया में दो बदलाव

समर्पण निधि अभियान में पार्टी ने इस वर्ष दो बड़े परिवर्तन किए हैं। एक तो यह कि सहयोग निधि सिर्फ डिजिटल माध्यम से ही ली जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और कोई प्रश्न नहीं उठा पाए। दूसरा यह कि 20 हजार रुपये से अधिक सहयोग निधि देने वालों का पैन नंबर भी लिया जा रहा है। अभियान में कई जिले लक्ष्य से बहुत पीछे हैं। इंदौर जैसे बड़े शहरों में उद्योगपतियों और प्रबुद्धजन का बड़ा सहयोग मिल रहा है। पार्टी का लक्ष्य इस निधि के माध्यम से संगठन को आगामी चुनावों और भविष्य की गतिविधियों के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

फंड का इस तरह इस्तेमाल

एकत्रित राशि का बंटवारा संगठन के विभिन्न स्तरों पर इसके संचालन और मजबूती के लिए किया जाता है। कुल एकत्रित राशि का एक निश्चित हिस्सा राष्ट्रीय संगठन को भी भेजा जाता है, जिसका उपयोग देशव्यापी कार्यक्रमों और प्रचार के लिए होता है। एक बड़ा हिस्सा राज्य इकाई के पास रहता है। इसका उपयोग राज्य स्तरीय कार्यालयों के संचालन, चुनाव प्रबंधन और प्रदेश स्तर के कार्यक्रमों के लिए किया जाता है। शेष राशि जिलों और स्थानीय मंडलों के पास रहती है ताकि वे अपने स्तर पर संगठन की गतिविधियों और कार्यालय के दैनिक खर्चों को पूरा कर सकें।

संगठन इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से जिला और प्रदेश कार्यालयों का किराया, बिजली बिल और अन्य प्रशासनिक खर्च में करता है। पार्टी नेताओं के अनुसार एकत्रित और वितरित की गई राशि का ऑडिट करवाया जाता है। इसकी जानकारी आयकर विभाग को दी जाती है।

देश के कई राज्यों में समर्पण निधि अभियान समाप्त कर दिया गया है लेकिन मध्य प्रदेश में जारी है। आडिट के कारण केवल आनलाइन धनराशि स्वीकार की जा रही है। विधायक-सांसदों पर भी कोई दबाव नहीं है। जो स्वेच्छा से देंगे, वही हमें स्वीकार है।
– गोपी कृष्ण नेमा, प्रदेश प्रभारी, समर्पण निधि अभियान, भाजपा

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