अंतर्राष्ट्रीय

रेड सी से ईरान युद्ध तक: कैसे एडमिरल ब्रैड कूपर बने अमेरिका की सैन्य रणनीति का अहम चेहरा

मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान तनाव अब खुले सैन्य टकराव का रूप ले चुका है। इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई की कमान जिस व्यक्ति के हाथ में है, वह हैं अमेरिकी नौसेना के एडमिरल Brad Cooper। वर्तमान में वे United States Central Command (CENTCOM) के प्रमुख हैं और पूरे अभियान की रणनीति तैयार करने और उसे लागू करने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

इस युद्ध में उनकी भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि यह केवल सैन्य अभियान नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक संतुलन से जुड़ा हुआ संघर्ष है।


व्हाइट हाउस से युद्ध की रणनीति

रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी को अभियान शुरू होने से एक दिन पहले एडमिरल कूपर ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को व्हाइट हाउस में संभावित सैन्य विकल्पों पर विस्तृत जानकारी दी थी।

इस बैठक में युद्ध की संभावित दिशा, ईरान के जवाबी कदम और क्षेत्रीय प्रभावों पर चर्चा हुई। इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की।

हालांकि जैसे-जैसे संघर्ष आगे बढ़ा, स्थिति जटिल होती चली गई। ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों, खाड़ी क्षेत्र और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।


रेड सी संकट से मिली पहचान

एडमिरल कूपर को वैश्विक पहचान उस समय मिली जब 2024 में रेड सी में जहाजों पर हमले बढ़ने लगे थे। उस समय यमन के Houthi movement ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए थे।

यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक है। यहां संकट बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने लगी थी।

उस समय कूपर CENTCOM में दूसरे नंबर के अधिकारी थे और उन्हें इस खतरे से निपटने की रणनीति तैयार करने का जिम्मा मिला था।

कूपर ने केवल सैन्य रिपोर्टों पर भरोसा करने के बजाय खुद समुद्र में जाकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने कई युद्धपोतों का दौरा किया और नौसैनिक अधिकारियों के साथ मिलकर सुरक्षा रणनीति तैयार की।

इस सक्रिय नेतृत्व के कारण रेड सी में स्थिति काफी हद तक नियंत्रित की जा सकी।


अब सामने है सबसे बड़ी चुनौती

रेड सी संकट से कहीं ज्यादा कठिन चुनौती अब ईरान के साथ युद्ध है। यह वह सैन्य योजना है जिस पर वर्षों से पेंटागन में काम चल रहा था, लेकिन पहले के अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इसके संभावित परिणामों के कारण इसे लागू नहीं किया था।

अब इस संघर्ष के कारण Strait of Hormuz बंद हो गया है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।

इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है और तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।


युद्ध में बढ़ता दबाव

संघर्ष के दौरान अमेरिका को भी नुकसान उठाना पड़ा है। अब तक इस युद्ध में 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 140 से अधिक घायल हुए हैं।

इसके अलावा एक विवादास्पद हमले ने भी अमेरिका की आलोचना बढ़ा दी। ईरान में एक गर्ल्स स्कूल पर बमबारी में 168 बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद अमेरिकी संसद में भी सवाल उठने लगे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं युद्ध के राजनीतिक दबाव को और बढ़ा सकती हैं।


इजरायल के साथ मजबूत सैन्य सहयोग

एडमिरल कूपर का करियर मध्य पूर्व क्षेत्र से गहराई से जुड़ा रहा है। वे पहले अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट के कमांडर रह चुके हैं, जिसका मुख्यालय बहरीन में स्थित है।

उनके कार्यकाल के दौरान अमेरिका और इजरायल की नौसेनाओं के बीच सैन्य सहयोग काफी बढ़ा।

रिपोर्टों के अनुसार कूपर नियमित रूप से इजरायली सेना के प्रमुख Eyal Zamir से संपर्क में रहते हैं और दोनों देशों की सेनाएं मिलकर ईरान के खिलाफ अभियान चला रही हैं।


सैन्य रणनीतिकार के साथ कूटनीतिक समझ

ब्रैड कूपर केवल सैन्य अधिकारी ही नहीं बल्कि रणनीतिक सोच रखने वाले नेता भी माने जाते हैं। उन्होंने Harvard University और Tufts University से अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की है।

इसके अलावा उन्होंने National Intelligence University से रणनीतिक खुफिया में मास्टर डिग्री भी हासिल की है।

उनकी यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें सैन्य निर्णयों के साथ-साथ राजनीतिक और कूटनीतिक पहलुओं को भी समझने में मदद करती है।


आगे क्या होगा?

मध्य पूर्व में जारी इस संघर्ष का भविष्य अभी अनिश्चित है। युद्ध लंबा खिंच सकता है और इसके प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकते हैं।

ऐसे समय में एडमिरल ब्रैड कूपर की रणनीति और नेतृत्व बेहद अहम हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह युद्ध किस दिशा में जाएगा और कब खत्म होगा, इसमें कूपर की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

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