अंतर्राष्ट्रीय

अमेरिका-इजरायल के खिलाफ ‘विएत कांग’ की तरह लड़ रहे ईरानी, ‘सुरंग नेटवर्क’ हो रहा इस्तेमाल

अमेरिका-इजरायल के हमलों के बावजूद ईरान युद्ध में डटा हुआ है। सैन्य विशेषज्ञ टॉम कूपर ने इसकी तुलना वियतनाम युद्ध से की है, जहां वियत कांग ने सुरंग नेटवर्क का इस्तेमाल किया था।

News Article Hero Image

HighLights

  1. ईरान अमेरिका-इजरायल के हमलों के बावजूद युद्ध में डटा।
  2. सैन्य विशेषज्ञ ने ईरान की तुलना वियतनाम युद्ध से की।
  3. ईरान भूमिगत सुरंग नेटवर्क से मिसाइल, ड्रोन संचालित कर रहा।

अमेरिका-इजरायल के खिलाफ पिछले तीन हफ्तों से युद्ध के मैदान में डटे ईरान को देखकर दुनिया दंग है। एक तरफ जहां अमेरिका और इजरायल के हमले का केंद्र केवल ईरान है, वहीं ईरान के लिए इजरायल के साथ-साथ पश्चिम एशिया के वे छह से सात देश भी निशाने पर हैं, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ईरान के सैन्य ढांचे को ध्वस्त करने के लाख दावों और इजरायल के सटीक निशानों के बावजूद ईरान का टिके रहना दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है। आस्टि्रया के सैन्य विशेषज्ञ टाम कूपर ने ईरान के संघर्ष की तुलना विएतनाम युद्ध से कर दी है।

युद्ध में सूरंग नेटवर्क का प्रयोग

उन्होंने कहा कि 60 के दशक में दक्षिणी विएतनाम में जिस तरह से ‘विएत कांग’ समूह ने अमेरिका से लोहा लिया था, ईरानी बिल्कुल वैसे ही लड़ रहे हैं। ईरान के जवाबी हमले को देखते हुए कहा जा सकता है कि ये युद्ध जल्दी खत्म होनेवाला नहीं है।

कूपर ने कहा कि विएतनाम युद्ध में बड़े पैमाने पर सुरंग नेटवर्क का प्रयोग हुआ था, ठीक उसी तरह ईरान ने अपने अभियान को जारी रखने के लिए भूमिगत प्रणाली विकसित कर रखी है। ईरान इस प्रणाली का इस्तेमाल अपने मिसाइल और ड्रोन के लिए कर रहा है।

इसका मतलब है कि उनके ढेर सारे मिसाइल बेस जमीन के भीतर हैं। ऐसे ठिकानों को चिह्नित तो किया जा सकता है, लेकिन इन्हें ध्वस्त करना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका के पास शायद ही ऐसे हथियार हों, जो इन ठिकानों को तबाह कर सकें।

हथियाओं की संख्या सीमित

उन्होंने कहा कि जीबीयू-57 जैसे बंकर बस्टर बम से भी ये संभव नहीं है। साथ ही ऐसे हथियारों की संख्या भी सीमित है। उन्होंने ईरानी सेना की तैयारियों की गहराई को भी जबरदस्त बताया। उन्होंने कहा कि ईरानी सेना की प्रणाली में अंतर्निहित अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था है। इसके जरिये वे कई हफ्तों तक इसी तरह काम जारी रख सकते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button