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सुकमा में माओवाद का अंत, 25 लाख रुपये के इनामी पापाराव समेत 17 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान से 25 लाख रुपये का इनामी शीर्ष माओवादी कमांडर पापाराव, डीवीसीएम प्रकाश माड़वी, अनिल ताती सहित 17 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें सात महिला सदस्य भी शामिल हैं।

  1. 25 लाख इनामी शीर्ष माओवादी कमांडर पापाराव ने किया आत्मसमर्पण।
  2. पापाराव सहित कुल 17 माओवादियों ने हथियार डाले, 7 महिलाएं भी शामिल।
  3. छत्तीसगढ़ में सशस्त्र माओवाद के नेतृत्व का अंत करीब।

 इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों से मंगलवार को निकल कर आ रही तस्वीर बस्तर के इतिहास का रुख बदलने वाली सिद्ध हो रही है।

पश्चिम बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) का प्रभावशाली सदस्य 25 लाख रुपये का इनामी शीर्ष माओवादी कमांडर पापाराव अब आत्मसमर्पण के लिए बाहर आ चुका है।

माओवादी कमांडर पापाराव के साथ डीकेएसजेडसी सदस्य डिविजनल कमेटी सदस्य (डीवीसीएम) प्रकाश माड़वी, डीवीसीएम अनिल ताती सहित 17 माओवादी भी हथियारों के साथ समर्पण की राह पर हैं। इनमें सात महिला सदस्य भी शामिल हैं।

माओवादी कमांडर पापाराव का आत्मसमर्पण

सुकमा जिले के नीलामड़गू गांव का रहने वाला पापाराव पिछले 35 वर्षों से माओवादी संगठन में सक्रिय रहा है। प्रदेश में शीर्ष नेतृत्व के लगातार खत्म होने के बाद वह इकलौता डीकेएसजेडसी स्तर का माओवादी बचा था। पापाराव के समर्पण के साथ ही छत्तीसगढ़ में सशस्त्र माओवाद के नेतृत्व का अंत लगभग तय माना जा रहा है।

मंगलवार सुबह बस्तर के यूट्यूबर पत्रकार रानू तिवारी के साथ इंद्रावती क्षेत्र से पापाराव और अन्य माओवादियों की पहली तस्वीर सामने आई।

रानू तिवारी ने बताया कि सभी माओवादी समर्पण के लिए निकल चुके हैं। उन्हें सुरक्षित लाने के लिए सुरक्षा बल की टीम जंगल के भीतर रवाना हो चुकी है।

सूत्रों के अनुसार सभी माओवादी दोपहर तीन बजे बीजापुर जिले के कुटरू थाने में पहुंच चुके थे। उन्हें बीजापुर में सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। बुधवार को सभी माओवादी बस्तर आइजी सुंदरराज पी. के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे।

अब नाम बचे हैं, असर नहीं

बस्तर में माओवादी संगठन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। विज्जा हेमला, सोढ़ी केशा जैसे कुछ नाम जरूर शेष हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इनकी सक्रियता लगभग समाप्त हो चुकी है। अधिकांश कैडर या तो पड़ोसी राज्यों की ओर भाग चुके हैं या हथियार छोड़कर गांव लौट आए हैं।

दो साल में बिखर गया ‘रेड कमांड’

पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति और इंटेलिजेंस के चलते माओवादी संगठन की कमर टूट चुकी है। माओवादी बसव राजू, गुडसा उसेंडी, कोसा, हिड़मा, सुधाकर और चलपति जैसे बड़े कमांडर मारे गए।

भूपति, देवजी, मल्लाजी रेड्डी, रुपेश, सोढ़ी देवा और सुजाता जैसे शीर्ष नेताओं के समर्पण के साथ 2700 से अधिक कैडर हथियार छोड़ चुके हैं। इसी अवधि में 1800 से ज्यादा माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं।

अब झारखंड में आखिरी चुनौती

देश में माओवादी हिंसा के समूल उन्मूलन की समयसीमा 31 मार्च 2026 तय है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओडिशा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में संगठन लगभग समाप्त हो चुका है।

अब झारखंड में पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा अंतिम बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिस पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर टिकी है।

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