ईरान और यूएई के बीच BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में टकराव

नई दिल्ली। बीआरआईसीएस देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच वाक्युद्ध की खबर सामने आई है। यह विवाद विशेष रूप से उस बयान को लेकर उभरा, जिसे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दिया था। नेतन्याहू का दावा था कि उन्होंने हाल ही में ईरानी-इराक युद्ध के दौरान गल्फ देश यूएई का दौरा किया था, जिसे यूएई ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।
इस बयान के बाद ईरान के शीर्ष कूटनीतिज्ञ अब्बास अराकची ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “जो लोग इजरायल के साथ मिलकर क्षेत्र में विभाजन फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें इसकी पूरी कीमत चुकानी होगी।” अराकची के इस बयान से स्पष्ट हुआ कि ईरान इस विवाद को गम्भीरता से ले रहा है और किसी भी प्रकार के छद्म प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगा।
यूएई की ओर से नेतन्याहू के दौरे की घोषणा का खंडन किए जाने के बाद स्थिति गंभीर होती चली गई। वैश्विक राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकार के विवादों से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है, खासकर ऐसे समय जब मध्य पूर्व पहले से ही विभिन्न राजनीतिक और सैन्य संघर्षों की चपेट में है।
BRICS बैठक में इस मामले पर बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखने के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को बिगाड़ने से बचने का भी इशारा किया है। हालांकि, इसके बावजूद उनकी बयानबाजी में कड़वाहट झलकती रही, जिससे यह साफ दिखा कि मतभेद अभी दूर नहीं हुए हैं।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यूएई और ईरान के बीच यह टकराव कई स्तरों पर गहरे जमीनी विभाजन को दर्शाता है, जिसमें क्षेत्रीय रणनीति, सहयोग और इजरायल से संबंध जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर दोनों देशों के बीच संवाद की कोशिशें जारी हैं और इस प्रकार के विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर मध्य पूर्व की राजनीति की जटिलता और क्षेत्रीय देशों के बीच भरोसे की कमी को उजागर किया है, जिसके चलते स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की भूमिका और भी अहम हो जाती है। आगे की संभावनाओं पर नजर रखते हुए, विशेषज्ञ यह मानते हैं कि दोनों पक्षों को संवेदनशीलता और समझदारी के साथ आगे बढ़ना होगा ताकि क्षेत्र में शांति और सहयोग का माहौल बना रहे।




