विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी रूस तेल छूट की समाप्ति से पहले ‘एकतरफा’ प्रतिबंधों पर कड़ी चोट की

नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद पर दी गई दूसरी छूट 16 मई को समाप्त होने वाली है। इस मामले पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका की एकतरफा प्रतिबंध नीति की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा है कि ऐसे प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
मई महीने की शुरुआत से ही भारत का मॉस्को से तेल आयात लगभग 1.96 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक बढ़ गया है। यह वृद्धि वैश्विक तेल बाजार में तेजी से बदलते परिदृश्य और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों को लेकर भारत की बढ़ती हुई जरूरतों को दर्शाती है।
जयशंकर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विविध और स्थिर स्रोतों की तलाश कर रहा है। हम समझते हैं कि प्रत्येक देश की अपनी नीतियां होती हैं, लेकिन किसी भी प्रतिबंध या छूट को एकतरफा रूप में लगाना व्यापारिक और वैश्विक संबंधों के लिए उचित नहीं है।’
यह छूट अमेरिका ने रूस के तेल आयात पर लगाए गए प्रतिबंधों की शुरुआत में दी थी, जिससे कुछ विशिष्ट देशों को रूस से क्रूड ऑयल खरीदने की अनुमति मिली थी। इसके तहत भारत ने रूस से तेल खरीद के विकल्प को बनाए रखा था, खासकर तब जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि मई के मध्य तक इस छूट के समाप्त होने से भारत के रूस से तेल आयात पर प्रभाव पड़ेगा, परन्तु भारत सरकार ने अपनी नीति को संतुलित करते हुए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता दी है। भारत निरंतर अपनी ऊर्जा रणनीति को वैश्विक परिदृश्य के अनुसार संशोधित कर रहा है।
विदेश मंत्रालय ने भी यह स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी एकतरफा प्रतिबंध को स्वीकार नहीं करता और वह अपने अंतरराष्ट्रीय समझौतों तथा सहयोग के सिद्धांतों के अनुरूप ही कार्य करता है। जयशंकर ने कहा, ‘भारत साझा हितों के आधार पर सहयोग के पक्ष में है, ऐसा कोई एकतरफा कदम जिससे कोई देश प्रभावित होता है, उसे अस्वीकार करता है।’
विशेष रूप से इस संदर्भ में, ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की नीतियाँ निरंतर विकसित हो रही हैं। तेल की बढ़ती लागत, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां और भू-राजनीतिक विवादों के बीच, भारत ने अपनी खरीद में विविधता लाई है जिससे कि किसी विशेष देश पर निर्भरता कम हो सके।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता के लिए संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं और सभी देशों को पारस्परिक सम्मान एवं सहयोग का रास्ता चुनना चाहिए। रूस से तेल की खरीद पर छूट समाप्त होने के बावजूद, भारत अपने ऊर्जा जरूरतों को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस विषय पर आगे संकेत देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी विदेश नीति में सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग को केंद्र में रखता है ताकि राष्ट्रीय हितों और वैश्विक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बना रहे।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का भी मानना है कि यू.एस. की यह प्रतिबंध नीति वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा सकती है, जिससे कई देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक उपाय तलाशने पड़ सकते हैं। वहीं, भारत इस चुनौती का सामना करते हुए निरंतर एक मजबूत और स्थायी ऊर्जा रणनीति पर कार्य कर रहा है।




