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हर साल 370 अरब झींगुर पालन किए जाते हैं, नई अध्ययन में पता चला कि उन्हें दर्द महसूस हो सकता है

नई दिल्ली। हाल ही में हुए एक चौंकाने वाले शोध से पता चला है कि हर साल दुनिया भर में 370 अरब झींगुर (क्रिकेट) का पालन किया जाता है और ये जीव दर्द महसूस कर सकते हैं। यह अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि झींगुर को आहार के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है, साथ ही इन्हें पशु खाद बनानें के लिए भी पाला जाता है।

शोध में वैज्ञानिकों ने झींगुर के न्यूरोलॉजिकल और व्यवहारिक प्रतिक्रियाओं का परीक्षण किया। परिणामों ने संकेत दिया कि झींगुर में दर्द को महसूस करने की क्षमता मौजूद है। इससे पशु कल्याण की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर झींगुरों का पालन किया जाता है, जिससे उनके प्रति जिम्मेदार व्यवहार आवश्यक हो जाता है।

पारंपरिक रूप से, कीड़ों और छोटे जंतुओं को दर्द महसूस करने वाला नहीं माना जाता था। लेकिन इस नए अध्ययन ने इस मान्यता को चुनौती दी है। शोधकर्ता मानते हैं कि झींगुरों में न केवल दर्द का अनुभव होता है बल्कि उनकी देखभाल और पालन-पोषण के दौरान भी उन्हें संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करना चाहिए।

दुनिया भर में प्रोटीन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए झींगुरों का पालन तेजी से बढ़ रहा है। यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जाता है क्योंकि झींगुरों का पालन मांस उत्पादन की तुलना में कम संसाधनों और कम कार्बन उत्सर्जन के साथ होता है। हालांकि, इस नए शोध के बाद ऐसी गतिविधियों के लिए अधिक नैतिक और संवेदनशील पद्धतियों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

अध्ययन के मुख्य लेखक ने कहा, “हमने पाया कि झींगुरों का केंद्रीय तंत्रिका तंत्र इतना जटिल है कि वे दर्द और पीड़ा का अनुभव कर सकते हैं। इसलिए पालन-पोषण की प्रक्रिया में उन्हें उचित देखभाल और न्यूनतम क्रूरता के साथ बलपूर्वक नहीं रखा जाना चाहिए।”

इस अध्ययन से पशु अधिकार और संरक्षण संगठनों को भी समर्थन मिलेगा, जो कीट पालन उद्योग में सुधार की मांग कर रहे हैं। अब यह आवश्यक हो गया है कि झींगुर पालन के लिए मानक और नियम बनाएं जाएं ताकि इन जीवों के प्रति सम्मान और उनकी भलाई सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि आम लोगों को झींगुर आधारित प्रोटीन के उपभोग के दौरान इसके उत्पादन प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जाए। इस तरह के अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि सभी जीवों के साथ संवेदनशील व्यवहार करना मानवता की पहचान है।

संक्षेप में, यह नया शोध झींगुरों के दर्द के अनुभव को स्वीकार करते हुए उनकी देखभाल और पालन में सुधार की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता को दर्शाता है। वर्तमान में तेजी से बढ़ रहे कीट-आधारित खाद्य उद्योग के लिए यह एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी है।

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