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UP पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग की बैठक में अहम निर्णय: नॉन-क्रीमीलेयर प्रमाण पत्र में संशोधन की आवश्यकता पर मंथन

आंनद प्रकाश शुक्ला
  प्रधान संपादक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली, सदस्य सूर्य प्रकाश पाल, अन्य सदस्य और सचिव मनोज कुमार सागर उपस्थित रहे। इस बैठक में पिछड़े वर्ग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

कहार जाति के विलोपन पर गहन चर्चा, यथावत रखने का निर्णय

बैठक में पिछड़ी जाति सूची में सूचीबद्ध कहार जाति के विलोपन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। गहन चर्चा के बाद आयोग ने निर्णय लिया कि कहार जाति को अन्य पिछड़े वर्ग की सूची से विलोपित करने का कोई औचित्य नहीं है, और इसे यथावत रखा जाएगा।

विमुक्त घुमंतू जनजातियों की सूची में सम्मिलन पर स्पष्टता

विमुक्त घुमंतू जनजातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में सम्मिलित करने के विषय पर भी विचार हुआ। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी जाति को विमुक्त जनजाति में सम्मिलित करने की प्रक्रिया आयोग द्वारा नहीं की जाती है।

तेल घानी व्यवसाय के विकास हेतु राज्य तेल घानी बोर्ड गठन का प्रस्ताव

बैठक में तेल घानी व्यवसाय से जुड़े लोगों के विकास और उनके हितों की रक्षा के लिए राज्य तेल घानी बोर्ड के गठन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इस पर चर्चा करते हुए आयोग ने निर्णय लिया कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी एकत्र कर इसे आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि ठोस कदम उठाए जा सकें।

नॉन-क्रीमीलेयर प्रमाण पत्र में संशोधन की आवश्यकता पर मंथन

आयोग ने अन्य पिछड़े वर्गों के लिए नॉन-क्रीमीलेयर प्रमाण पत्र प्राप्त करने में हो रही कठिनाइयों पर भी गहन मंथन किया। इस प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रमाण पत्र के प्रारूप में आवश्यक संशोधन के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

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