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पटेल जयंती पर लहरपुर में एकता का संदेश, पदयात्रा में शामिल हुआ बड़ा जनसमूह।

सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर लहरपुर में राष्ट्रभक्ति का महापर्व

सीतापुर जिले का लहरपुर क्षेत्र उस समय राष्ट्रीय एकता के केंद्र में था, जब पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर “एकता पदयात्रा” का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केवल एक स्मरणोत्सव नहीं था, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण में पटेल के योगदान को जन-जन तक पहुँचाने का एक प्रेरक प्रयास भी था। सुबह से लेकर शाम तक पूरा क्षेत्र मानो देशभक्ति के रंग में डूबा रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत सैकड़ों की संख्या में जुटे स्थानीय लोगों, भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रध्वज के साथ की। युवा, महिलाएँ, वरिष्ठ नागरिक—सभी पीढ़ियाँ एक साथ चलती दिखाई दीं, मानो सरदार पटेल के प्रति सम्मान की एक साझा कड़ी बन चुकी हों।

सरदार पटेल — इतिहास से वर्तमान तक

आज का भारत जिस शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में खड़ा है, उसकी नींव में सरदार वल्लभभाई पटेल के कठिन प्रयासों की अमिट छाप है। 500 से अधिक रियासतों का एकीकरण, मजबूत प्रशासनिक ढांचा, राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि—ये सभी क्षेत्र पटेल की दूरदर्शिता और अटल संकल्प के प्रमाण हैं। इसी विरासत को याद करने और नई पीढ़ी में इसके प्रति समझ विकसित करने के उद्देश्य से इस पदयात्रा का आयोजन किया गया।

विशिष्ट अतिथियों का आगमन: कार्यक्रम की गरिमा बढ़ी

कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री राजा मयंकेश्वर शरण सिंह, भाजपा अवध क्षेत्र के अध्यक्ष कमलेश मिश्र, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा, और लहरपुर के निवर्तमान विधायक सुनील वर्मा की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।

भीड़ में जोश तब और बढ़ गया, जब ये सभी अतिथि पदयात्रा में शामिल हुए और स्थानीय जनता के साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़े।

राजा मयंकेश्वर शरण सिंह: “सरदार पटेल भारत की आत्मा हैं”

सभा को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री ने कहा कि भारत की एकता और अखंडता की मूल भावना सरदार पटेल के विचारों से ही प्रेरित है। उन्होंने उदाहरणों के साथ समझाया कि किस प्रकार रियासतों को एक सूत्र में बांधना इतिहास का सबसे बड़ा राष्ट्रीय अभियान था।

उन्होंने कहा—
“देश के अलग-अलग कोनों में स्थित रियासतें कभी अपने-अपने हितों में बंटी थीं, लेकिन पटेल ने उन्हें राष्ट्रवाद का एक ही सूत्र प्रदान किया। आज का भारत उनका ही सपना है।”

लोगों ने मंत्रियों के इन शब्दों पर जोरदार तालियों और नारों से प्रतिक्रिया दी।

कमलेश मिश्र का संदेश: अखंड भारत की आधारशिला

अवध क्षेत्र अध्यक्ष कमलेश मिश्र ने अपने भाषण में भारतीय एकता को वैश्विक परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि जब तक पूरा देश एक रहेगा, तब तक भारत मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने बताया कि पटेल के योगदान को समझना आज इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका निभा रहा है।

उनका संदेश था—
“भारत सिर्फ भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि विचारों और संस्कृतियों का संगम है। यही संगम हमारी असली शक्ति है।”

राजेश वर्मा की ऐतिहासिक व्याख्या

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने पटेल के जीवन के महत्वपूर्ण चरणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पटेल का नेतृत्व किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था; वह राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक थे। उनका व्यवहार, निर्णय और राष्ट्रहित में अडिगता आज भी प्रशासनिक और राजनीतिक जीवन के लिए प्रेरणादायक है।

पदयात्रा का उत्साह: गली-गली में देशभक्ति का जश्न

पदयात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ती, लोग अपने घरों से निकलकर यात्रियों का स्वागत करते दिखाई देते। कई स्थानों पर फूल वर्षा की गई। बच्चों ने हाथ में छोटे-छोटे झंडे लेकर यात्रियों को उत्साहित किया।

सामाजिक संगठनों ने राहगीरों को पानी, चाय और नाश्ते की व्यवस्था कर मानव सेवा का परिचय दिया। पूरा वातावरण उत्सव जैसा था—जहाँ देशभक्ति और सामाजिक एकजुटता दोनों एक साथ महसूस हो रही थीं।

समापन: धन्यवाद और संकल्प

कार्यक्रम के अंत में जिला अध्यक्ष राजेश शुक्ला ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं और नागरिकों का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने इस आयोजन को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय भावना का उत्सव बताया।

उन्होंने कहा—
“सरदार पटेल की प्रेरणा सदैव हमारे मार्गदर्शक रहेगी। आज की यह पदयात्रा हमारे उस संकल्प का प्रतीक है, जो एकता और अखंडता को सर्वोपरि मानता है।”

इस प्रकार लहरपुर की धरती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जहाँ जन-जन में राष्ट्रभक्ति का भाव हो, वहाँ समाज स्वतः मजबूत होता है और राष्ट्र प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

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